लॉकडाउन में जिन दुकानों को सोमवार को खोलने की अनुमति नहीं दी गई है वह भी खुली रहीं। जबकि ग्रीन जोन में आने वाले जिलों को अपने जिले के अंदर यात्री वाहन के संचालन के लिए छूट दी गई है। लेकिन यात्री वाहन संचालकों ने इसमें कोई रूचि नहीं दिखाई। वाहनों के पहिए थमे रहे। दूसरी ओर सोमवार को बड़ी संख्या में दुकान खुलने से जिला मुख्यालय में भीड़ जमा होती रही। जिसमें नियमों का उल्लंघन किया जाता रहा।
कांकेर जिले में पूर्व में जारी आदेश के अनुसार सोमवार व गुरूवार को कपड़ा, बर्तन, जेवर तथा मोबाइल रिचार्ज की दुकान को निर्धारित समय के लिए छूट दी गई है। जिसमें सोमवार को ये दुकानें तो खुलीं लेकिन इसके साथ साथ बुधवार व शनिवार को खोले जाने वाली जूता चप्पल दुकान तथा मंगलवार व शुक्रवार को खोले जानी वाली फैंसी स्टोर्स भी खोल दिए गए। जब दुकान खोलने के बारे में पूछा गया तो दुकानदारों का कहना था दुकान खोलने का आदेश आने वाला है।
वहीं कुछ दुकान सोशल डिस्टेंस रख कर दुकान खोलने का हवाला देते रहे। जिन दुकानों को खोलने की छूट है उनमें भी अधिकतर दुकानों में नियमों का पालन नहीं होता दिखा। मोबाइल फोन रिचार्ज दुकान में ग्राहकों की भीड़ रही। कुछ जगह रिचार्ज के नाम पर मोबाइल भी बेचे जाते रहे। मोबाइल दुकान संचालक मास्क नहीं लगाए हुए थे।
दूसरी ओर जिलेवासियों को उम्मीद थी कि कांकेर जिला ग्रीन जोन में होने के कारण सोमवार 4 मई से छूट के बाद जिले के भीतर बस तथा टैक्सी चलना शुरू हो जाएगी। लेकिन दिन भर एक भी बस व टैक्सी नहीं चली। अर्से से लाकडाउन में फंसे लोगों को बड़ी निराशा लगी। बस संचालक आधे यात्री के साथ बस चलाने के नियम के चलते बस नहीं चला रहे हैं। उनका कहना है कि इस नियम को व्यवहारिक रूप से पालन करना संभव नहीं है। आधे यात्री को यात्रा कराने से उनका डीजल का खर्च भी नहीं निकलेगा।
शराब को छूट से चाय और पान ठेलों वालों में नाराजगी
लॉकडाउन के तीसरे दौर में जहां कई छूट दी गई है उसमें होटल और चाय व अन्य ठेला संचालकों को कोई छूट नहीं देने से उनमें नाराजगी है। पखांजूर के होटल और ठेला संचालक दुकान खोलने की मांग लेकर एसडीएम पखांजूर से मुलाकात कर उन्हें भी दुकान खोलने की अनुमति देने की मांग की। एसडीएम ने इसे शासन स्तर का मामला बताते उन्हें लौटा दिया। होटल संचालक रतन कुंडू , हरिचांद समददार, आशुतोष मजुमदार, बाबू पाल आदि ने बताया कि प्रदेश शराब दुकान खोल दी है तो हम होटल और ठेले वालो को क्यों छूट नहीं दी जा रही।
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