बास्केटबाॅल खिलाड़ी घर पर रहकर कर रहे प्रैक्टिस: बाल्टी को बना लिया बास्केट और मेडिसिनबॉल की जगह ईंट से कर रहे अभ्यास
मन में जुनून और लगन हो तो कोई भी बाधा आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती है। ऐसा ही जुनून इस लॉकडाउन के दौरान खिलाड़ी दिखा रहे हैं। बास्केटबॉल खिलाड़ियों ने जहां घर पर ही बाल्टी को बास्केट का रूप दे दिया है तो वहीं अन्य खिलाड़ी भी मैदान की कमी को घरेलू सामग्रियों से पूरा कर रहे हैं। यह देखकर उनके कोच भी ऑनलाइन प्रशिक्षण दे रहे हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया गया है। पिछले करीब ढाई महीने से खेल गतिविधियों पर रोक लगाई गई हैं। ऐसे समय में खिलाड़ी घरों पर रहकर ही प्रैक्टिस कर रहे हैं।
खेल प्रतियोगिताओं में जीत हासिल करने के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है। अंतरराष्ट्रीय कोच राजेश प्रताप सिंह ने बताया कि वीडियो कॉलिंग एप के माध्यम से सभी खिलाड़ियों को रोज एक घंटे अभ्यास कराते हैं। खेल से संबंधित जरूरी सामग्रियों की कमी पूरी करने के लिए खिलाड़ियों ने घर के ही संसाधनों को अपनाया है। खिलाड़ी मैदान में जिस तरह से अभ्यास करते हैं, ठीक उसी प्रकार इस समय घरों में ही कर रहे हैं।
निशाना साधती उर्वशी: बाल्टी से बना दी बास्केट
नेशनल गेम्स खेल चुकीं उर्वशी बघेल ने बताया कि स्टेडियम बंद होने के कारण अभ्यास नहीं हो पा रही थी। इस कारण घर पर ही दीवार पर कील के सहारे बाल्टी को लटका दिया है। इसी पर लगातार अभ्यास करती हूं। यदि लगातार अभ्यास नहीं किया तो फ्लो खत्म हो जाएगा और आगे आने वाली प्रतियोगिताओं में परेशानी होगी।
साक्षी: मेडिसिन बॉल की जगह ईंट व बाल्टी का उपयोग
विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकीं साक्षी तिर्की समेत कई खिलाड़ी मैदान की कमी की पूर्ति घर की सामग्रियों से पूरी कर रही हैं। खिलाड़ियों ने बताया कि बैलेंसिंग बनाने के लिए मैदान पर तीन से चार किग्रा वजन की मेडिसिन बॉल एक हाथ में दूसरे हाथ में बास्केट बॉल पकड़कर अभ्यास कराया जाता है, लेकिन घर पर मेडिसिन बॉल की कमी को पूरा करने के लिए एक हाथ में ईंट या बाल्टी में कुछ वजन रखकर अभ्यास कर रहे हैं।
अथर्व: बैलेंसिंग और डिफेंसिंग का कर रहे अभ्यास
कोच राजेश सिंह ने बताया कि खेल प्रतियोगिताओं में बैलेंसिंग और डिफेंसिंग बहुत जरूरी होती है। खिलाड़ी अथर्व प्रताप सिंह ने बताया कि वह लगातार घर पर रहकर ही अभ्यास कर रहे हैं। इसके लिए घरों की ही दीवार और अन्य संसाधन उनके सहायक उपकरण बने हुए हैं। इसी तरह अन्य खिलाड़ी भी घर में मौजूद सामग्रियों से खेल के उपकरणों की कमी को पूरा कर रहे हैं।
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