जिले के गमपुर में तेलंगाना से लौटने वाले किसी मजदूर की मौत नहीं हुई है, इलाके के अवलमगुड़ी में 15 दिन पहले एक व्यक्ति की मौत हुई थी लेकिन वह भी पिछले 7-8 साल से बीमार था और उसे फायलेरिया बीमारी की शिकायत थी। गमपुर या इसके आसपास के इलाके में हाल ही में लौटने वाले किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।
गमपुर में बाहर से लौटे दो मजूदरों की मौत की खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग की एक टीम शुक्रवार की देर शाम यहां जांच के लिए पहुंची हुई थी। घोर नक्सल प्रभावित और बीहड़ों में बसे इस गांव में स्वास्थ्य अमले की टीम को पहुंचने में आठ घंटे लगे। स्वास्थ्य विभाग की टीम गंगालूर से कई नदी नालों व 4 से ज्यादा पहाड़ियों को पार कर मल्लूर, एड़समेटा,
पेद्दापाल, डोंडी तुमनार से होते हुए पीडिया से आगे गमपुर पंचायत पहुंची। टीम शुक्रवार की सुबह 10.30 बजे गंगलूर से रवाना हुई और शाम 6 बजे गमपुर पहुंची। यहां पहुंचने के बाद टीम रात में गांव में ही रुक गई और मौत से संबंधित जानकारियां जुटाई। इसके बाद शनिवार को दोपहर बाद स्वास्थ्य टीम गंगालूर पहुंची। वापस लौटी टीम के सदस्य डाॅ युधिष्ठिर साहू ने बताया कि गांव में लगभग 700 परिवार के रहते हैं गांव पहुंचविहीन है।
50 से ज्यादा लोग तेलंगाना से लौटे थे
इधर टीम जांच में पता चला कि तेलंगाना के भद्राचलम व उसके आसपास के इलाकों में मिर्ची तोड़ने गए 50 से 60 लोग करीब एक सप्ताह पहले गांव लौटे हैं। इनके गांव लौटेने के बाद ग्रामीणों ने इन्हें गांव में नहीं घुसने दिया और सभी लोगों को गांव से दूर डोंडी तुमनार व गमपुर गांव के बीच नदी के पास पेड़ के नीचे क्वारेंटाइन में रखा है। बाहर से आये लोग यहीं पर खुद खाना बना रहे हैं और खा रहे हैं। किसी को भी गांव में आने की इजाजत नहीं है।
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