शैक्षणिक सत्र 2020-21 में जिले में अन्य पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए पहला पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास यानी हॉस्टल खुलेगा। इसके लिए राज्य शासन ने हरी
झंडी दे दी है। लॉकडाउन के बीच शासन की ओर से वीडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से यह जानकारी देकर जिला प्रशासन व अदिवासी विकास विभाग के अफसरों को देकर उपयुक्त स्थान तलाशने कहा गया है।
स्थायी भवन बनने तक किसी सरकार भवन में छात्रावास संचालित कर आवासीय सुविधा बच्चों को उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेशभर में कुल 9 छात्रावास खोलने को लेकर शासन ने हरी झंडी दी है। जिसमें दुर्ग संभाग में सिर्फ बालोद में 50 सीटर का छात्रावास खोलने सहमति दी गई है। जिसमें कक्षा 11वीं से पीजी यानी कॉलेज स्तर के स्टूडेंट्स रहेंगे। सभी को आवासीय सुविधा मिलेगी।
संजारी बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने छात्रावास खोलने अनुशंसा की थी। दरअसल स्थानीय विधायक की अनुशंसा जरुरी होता है। माना जा रहा है कि बालोद या गुरूर क्षेत्र में ही छात्रावास की सुविधा बच्चों को मिलेगी। हालांकि नया शैक्षणिक सत्र कब से शुरू होगा, इस पर अभी कोरोना के चलते संशय है। दरअसल लॉकडाउन के कारण कोई बता नहीं पा रहे हैं।
यह होंगे फायदे
आवासीय सुविधा मिलने के बाद पात्र बच्चों को मनपसंद स्कूल में पढ़ाई करने में सहूलियत मिलेगी। किराए के भवन में नहीं रहना पड़ेगा। दूसरे जिले के बच्चों को ज्यादा फायदा होगा, जो रोजाना आना-जाना करते थे। विभागीय अफसरों का कहना है कि हर साल अपिव के बच्चे आवेदन करके मांग करते थे कि हमें भी आवासीय सुविधा मिलें, हमारे वर्ग का छात्रावास नहीं है तो एसटी, एससी वर्ग के लिए बने छात्रावास भवन में शिफ्ट करें लेकिन नियम के चलते अफसर कुछ नहीं कर पा रहे थे।
इस पर अब सहमति बनी
जिले में अन्य पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए सिर्फ एक ही प्री मैट्रिक छात्रावास है। जिसमें कक्षा 6 वीं से लेकर 10 वीं तक के बच्चों को आवासीय सुविधा मिल रही है। पोस्ट मैट्रिक छात्रावास अब तक नहीं है। बच्चों से आवेदन मिलने के बाद विभाग व जिला प्रशासन की ओर से कई बार प्रस्ताव भेजकर शासन से छात्रावास खोलने की मांग की जा रही थी। जिस पर अब सहमति बनी।
बच्चों को मिलेगा लाभ
आदिवासी विकास विभाग की उपायुक्त माया वारियर ने बताया कि अन्य पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास खोलने को लेकर शासन की ओर से सहमति मिल गई है। स्थायी भवन बनने तक किराए या किसी सरकारी भवन, जहां सभी सुविधाएं उपलब्ध हो, वहां अस्थाई रुप से छात्रावास संचालित कर बच्चों को आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। पिछले साल अपिव के 50 से ज्यादा बच्चों का आवेदन मिला था।
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