यूनियन और ओवरसीज बैंक के बाद अब पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में बड़ा लोन घोटाला सामने आया है। पीएनबी के दो शाखा से फर्जी दस्तावेज के आधार पर 67 लाख का कर्ज लिया गया लेकिन आधी किस्त जमा करने के बाद बंद कर दिया गया।
अब कर्जदार गायब है। मंगलवार को पीएनबी की श्याम नगर शाखा प्रबंधक नेहा तायल और शैलेंद्र नगर की प्रबंधक ममता साहू ने भी फर्जीवाड़े का केस दर्ज कराया है। हालांकि अभी इसमें किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई हैं। पुलिस ने बताया कि डब्ल्यूआरएस के अजय साखरे ने खुद को रेलकर्मी बताकर बैंक से 2018 में 2 लाख का होम लोन लिया था। इसी तरह से सुमीत जोशी और सुनीता पांडेय उर्फ डी मेघा ने फर्जी दस्तावेज से बैंक से कर्ज लिया। कुछ महीने तक किस्त जमा करने के बाद अचानक बंद कर दिया। बैंक ने कई बार नोटिस जारी किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तब आरोपियों के दस्तावेज की जांच की गई। इन दस्तावेजों में दिव्या जोशी, प्रणय साखरे, सुनील सोनी और अन्य के गवाह के तौर पर हस्ताक्षर है।पुलिस ने इन्हें भी आरोपी बनाया है। इसी तरह शैलेंद्र नगर शाखा से रवि राव वल्दमानी, सावित्री चंद्राकर और विजयशंकर तिवारी ने भी कर्ज लिया है। आरोपियों ने खुद को रेलवे कर्मचारी बताया था।
जेल में बंद हैं गिरोह के मास्टरमाइंड, एक बैंक एजेंट, दूसरा था रेलवे कर्मचारी
पुलिस ने बताया कि खमतराई का सुनील सोनी और सुनील राव दोनों ही गिरोह के मास्टर माइंड है। सुनील सोनी बैंक एजेंट था। उसका कई बैंकों से लिंक था। वहीं सुनील राव रेलवे में कर्मचारी था, जो बर्खास्त हो गया हैं। सोनी लोगों को आसानी से कर्ज दिलाने का झांसा देता था। उनके लिए दस्तावेज तैयार कराता था। वह कर्ज लेने वालों को राव के पास भेजता था। राव उनके लिए रेलवे से लेकर अन्य विभाग का फर्जी दस्तावेज बनाता था। उसी दस्तावेज के आधार पर कर्ज दिलाता था। आरोपियों ने कई रेलवे कर्मी और अधिकारियों के नाम से कर्ज लिया है। स्कैन करके उनके दस्तावेज में अपनी तस्वीर लगाकर बैंक में खड़े हो गए और कर्ज मिल गया। यहां तक रेलवे के कर्मचारी और अधिकारियों के दस्तावेजों से भी इसी तरह की कूट रचना की गई हैं। पुलिस की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि शहर के आधा दर्जन बैंक से इसी तरह से 10 करोड़ की ज्यादा की ठगी हुई हैं।
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