राजधानी के सभी प्रमुख बाजार केवल दो दिन खुलने की वजह से कारोबारी परेशान हो गए हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने भले ही दो दिन के कारोबार की छूट दी है, लेकिन लेफ्ट-राइट सिस्टम की वजह से दुकानें हफ्ते में केवल एक दिन ही खुल रहीं हैं। यानी एक महीने में केवल चार दिन ही दुकानें खुल पाएंगी। इस वजह से कारोबार नहीं हो पा रहा है। कुछ दिनों तक दुकानें खुलने की वजह से एक महीने के खर्चों को मेंटेन नहीं रखा जा सकता है।
प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ अब सभी व्यापारिक संगठन एकजुट हो गए हैं। संगठनों की ओर से मुख्यमंत्री, कलेक्टर और एसएसपी को ज्ञापन सौंपकर कहा है कि बाजार हफ्ते में दो के बजाय पांच दिन तक खुलना चाहिए। वीकएंड के लॉकडाउन का सख्ती से पालन करना चाहिए। संगठनों ने यह भी भरोसा दिलाया है कि दो दिन के कारोबार में जिस तरह से नियमों का पालन किया जा रहा है पांच दिन के बाजार में भी उसी तरह से नियमों का पालन किया जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल पांच दिन खुले
रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीषराज सिंघानिया और इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन का कहना है कि दोनों बाजारों को हफ्ते में पांच दिन खोलने की अनुमति दी जाए। दो और चार पहिया वाहनों के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स शो रूम में एसी, फ्रिज, टीवी आदि खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग नहीं जुटते हैं। ऐसे में सोशल डिस्टेसिंग के साथ पांच दिनों तक कारोबार आसानी से हो सकता है। अभी शो रूम केवल दो दिन के लिए खुल रहे हैं, जिससे कारोबार भी नहीं हो पा रहा है।
खर्चा महीने भर का, दुकानें खुल रही केवल 8 दिन
पंडरी थोक कपड़ा बाजार के अध्यक्ष चंदर विधानी ने बताया कि पंडरी से छत्तीसगढ़, ओड़िशा, बिहार आदि राज्यों में माल जाता है। लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान 2 दिन में 4 घंटे की छूट मिलती है। लेफ्ट-राइट में हफ्ते में केवल दो दिन दुकानें खुल रही हैं। लेकिन दुकानों का किराया, बिजली बिल, स्टाफ की सैलरी महीनेभर की देनी पड़ेगी। शादियों का सीजन लगभग खत्म हो गया है।
"अभी लेफ्ट-राइट नियम और केवल दो दिन की छूट मिलने की वजह से कारोबार में तेजी नहीं है। पांच दिन तक बाजार खोलने पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।"
-जितेंद्र बरलोटा, अध्यक्ष छग चैंबर
"कारोबारी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सभी नियमों का पालन कर रहे हैं। हफ्ते में दो दिन बाजार खुल रहे हैं तो पांच दिन की भी छूट दी जा सकती है। इससे सभी को फायदा होगा।"
-अमर पारवानी, अध्यक्ष छग कैट
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