रबी फसल की बर्बादी और कोरोना काल की वजह से जिले के किसान डिफाल्टर होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। जिले के 22 हजार 757 किसानों ने लोन लिए पर पटा नहीं पाए हैं। किसानों को अप्रैल महीने में ये लोन बैंक में जमा करने थे। ऐसे किसान अब 15 जून तक सहकारी बैंकों में पैसा जमा कर सकते हैं।
जिला केंद्रीय सहकारी बैंक की 20 शाखा बैंकों के माध्यम से जिले के किसानों ने रबी फसल के लिए पिछले साल कर्ज लिए थे। रबी फसल की पैदावारी पूरी हो चुकी है लेकिन पहली बार जिले के किसानों के पास बैंक के कर्ज पटाने के लिए पैसे नहीं है। इसलिए कि रबी फसल ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश की वजह से बर्बाद हो गई। गेंहू, चना और सब्जियों की बची फसल पर कोरोना काल की मार पड़ी। लाॅक डाउन में मजदूर घर से नहीं निकले। बाजार प्रभावित हुआ। चने और सब्जियों को मवेशियों के खाने के लिए छोड़ने की नौबत आई। मौजूदा हालात से पीड़ित किसान बैंकों से लिए कर्ज को पटाने की स्थिति में नहीं हैं।
खाद, बीज के रूप में करोड़ों रुपए लिए कर्ज
सहकारी बैंकों से खाद व बीज के लिए जिले के किसानों ने करोड़ों रुपए कर्ज लिए। अब किसानों को खरीफ फसल के लिए सहकारी समितियों से खाद व बीज बांट रहे हैं। इसके लिए भी बिना ब्याज के लोन दिए जा रहे हैं। किसानों के समक्ष समस्या यह है कि वे रबी फसल का कर्ज पटा नहीं पाए है इसलिए और कर्ज ले नहीं पा रहे।
45.84 करोड़ रुपए कर्ज है राज्य के किसानों पर
कर्ज लेने वाले किसानों पर 45.84 करोड़ रुपये का नगद कर्ज है। किसान ये पैसे भी नहीं लौटा पा रहे। फसल बेचकर हर साल किसान कर्ज पटाते रहे हैं। फसल खराब होने की वजह से सरकार क्षतिपूर्ति के रूप में करीब 29 करोड़ रुपये किसानों को देगी।
खरीफ फसल का लोन भी 205 करोड़ रुपए बकाया
जिले में खरीफ फसल का सीजन शुरू हो गया है लेकिन 931 किसानों ने 205 करोड़ रुपये लोन नहीं चुकाए हैं। इन किसानों ने धान खरीदी के दौरान अपना लोन नहीं काटने के लिए आवेदन दिया था इसलिए उन्हें आगे लाेन पटाने की छूट दी गई थी।
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