एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने ऐसी किट बनाई है, जिससे केवल पौने 2 घंटे में कोरोना की रिपोर्ट आ जाएगी। यही नहीं किट की लागत भी महज 500 रुपए है। खास बात यह है कि इसमें स्क्रीनिंग व कन्फर्मेशन के लिए दो बार सैंपल जांच की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
इससे एक बार में 46 के बजाय 94 सैंपलों की जांच हो सकेगी। डॉक्टरों ने नई तकनीक को पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पेटेंट होने के बाद इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च आईसीएमआर की अनुमति की जरूरत होगी। इसके बाद ही इस किट से वैध रूप से मरीजों के सैंपलों की जांच हो पाएगी। इस प्रक्रिया में डेढ़ से दो माह या इससे ज्यादा समय लग सकता है। एम्स के डायरेक्टर डॉ. नितिन एम नागरकर ने नई किट को एम्स के लिए मील का पत्थर बताया है। वर्तमान में एम्स में आरटीपीसीआर किट से सैंपलों की जांच हो रही है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय सिंह नेगी, साइंटिस्ट डॉ. कुलदीप शर्मा ने चंडीगढ़ के डॉ. कृष्ण गोपाल की मदद से किफायती व मल्टीपल उपयोग वाली किट तैयार की है। इस किट में एक साथ तीन मरीज की जांच हो सकती है। वर्तमान में सैंपलों की दो बार जांच होती है। पहले स्क्रीनिंग की जाती है, उसके बाद कन्फर्मेशन के लिए फिर सैंपल लगाया जाता है। नई किट में एक बार में ही फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी।
नई किट में लागत और समय चार गुना कम
डॉ. नेगी ने बताया कि वर्तमान में दो-दो ट्यूब के हिसाब से चार ट्यूब लगता है। इससे किट की लागत व जांच में अधिक समय लगता है। नई किट से लागत व समय चार गुना घट जाएगा। पिछले दो माह से किट का ट्रायल चल रहा है। इसमें पॉजीटिव ही नहीं नेगेटिव रिपोर्ट वाले सैंपलों की जांच की गई। इसकी रिपोर्ट वही आई, जो आरटीपीसीआर किट से आई। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही नई किट बनाने की घोषणा की गई है।
"माइक्रो बायोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की नई खोज सराहनीय है। आईसीएमआर से अनुमति मिलने के बाद इस किट से सैंपलों की जांच शुरू हो जाएगी। इसमें कुछ समय लग सकता है।"
-डॉ. नितिन एम नागरकर, डायरेक्टर एम्स
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3dYSmQK
via
Comments
Post a Comment