हाइवे और बाइपास सड़कों पर पैदल चलते श्रमिकों को उनके गांव या प्रदेश की सीमा तक छोड़ा जा सके इसके लिए मंगलवार को बसों का इंतजाम किया गया। चार दिनों तक डीजल कौन भरवाएगा...इस चक्कर में बसें खड़ी थीं। भास्कर ने 19 मई के अंक में इस भर्राशाही पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की जिसके बाद मंगलवार को श्रम विभाग ने तहसीलदार को 4 लाख रुपए दिए। पैदल चलकर या दूसरे शहरों से बसों से रायगढ़ जिले में आए जांजगीर, डभरा, ओडिशा और बिहार के 50 से ज्यादा मजदूरों को गांव या बॉर्डर तक छोड़ा गया। वहीं देर शाम 150 मजदूररायगढ़ पहुंचे। मुख्यमंत्री की घोषणा होने के बाद पैदल चल रहे श्रमिकों के लिए 20 बसों का इंतजाम किया गया था लेकिन डीजल का प्रबंध नहीं हुआ था। मंगलवार सुबह पूरा प्रशासन हरकत में आया और बसों में डीजल भरवाने के बाद मजदूरों को लाने और दूसरे शहरों में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। श्रम विभाग ने बसों में डीजल भरवाने के लिए तहसीलदार को मंगलवार को 4 लाख रुपए का चेक दिया है।
सुबह 50 को छोड़ा, शाम को 150 को लेकर आए
मंगलवार की दोपहर 12 बजे तक करीब जांजगीर चांपा, डभरा, ओडिशा व बिहार के श्रमिकों को राज्य के बॉर्डर पर छोड़ा गया। देर शाम को करीब 150-150 मजदूर बिलासपुर से रायगढ़ पहुंचे उन्हें फिर बसों से अलग-अलग ब्लॉकों में भेजा गया था। ट्रांसपोर्ट नगर में पुलिस श्रमिकों पर नजर रख रही है।
फंड की कमी नहीं है
"छत्तीसगढ़ के मजदूर जो पैदल आ रहे हैं,उन्हें अंतरराज्यीय बसों से लेकर उन्हें रायगढ़ लाना है। गाड़ियों की व्यवस्था परिवहन विभाग करेगा। डीजल की डिमांड आएगी तो राजस्व विभाग के अफसरों का फंड देंगे, फंड की कमी नहीं है।''
-विकास सरोदे, सहायक आयुक्त, श्रम विभाग
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