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दो साल की बच्ची और पत्नी के साथ भूखे-प्यासे 410 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे

कुन्नूर से दो साल की बच्ची और अपनी पत्नी को लेकर भूखे प्यासे निकले खरथुली निवासी मोहन निषाद 410 किलोमीटर पैदल चले। हैदराबाद आए और यहां पास बनवाने पांच दिनों भूखे प्यासे रहकर इस सफर को काटा।
त्रिवेंद्रम में आने के बाद उसे श्रमिक स्पेशल ट्रेन मिली और वह अपने गांव लौट सका। दुर्ग स्टेशन में दो श्रमिक स्पेशल ट्रेन आई। इस ट्रेन में दुर्ग संभाग के 152 लोग उतरे। पहली श्रमिक स्पेशल ट्रेन त्रिवेंद्रम से व दूसरी ट्रेन दरभंगा से आई। इन ट्रेनें में दुर्ग के 57, बालोद जिले के 22,राजनादगांव जिले के 63, कबीरधाम जिले के 11 और बेमेतरा जिले के 2 लोग पहुंचे। प्लेटफार्म क्रमांक एक पर ट्रेन रू की और उसके बाद जब गेट पर स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
14 दिनों तक क्वारेंटाइन सेंटरों मे रहेंगे श्रमिक: स्टेशन पर आने वाले लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कोरोना के लक्षण पूछे और उसके बाद उन्हें स्टेशन से बाहर भेजा।
पंजीयन करवाने वाले का ही रिकार्ड प्रशासन के पास
दीगर प्रांतों से आने वाले 2942 मजदूरों ने पंजीयन करवाया है। इनमें से अब तक 2150 मजदूर यहां आ चुके हैं। प्रशासनिक रिकार्ड के मुताबिक 732 प्रवासी मजदूर और आएंगे। इन मजदूरों को सेंटरों में क्वारेंटीन तो किया जा रहा है लेकिन जो मजदूर खुद पैदल या लिफ्ट लेकर आए हैं उनका रिकार्ड श्रम विभाग या प्रशासन के पास नहीं हैं। जिन लोगों को गांव के सेंटरों में क्वारेंटाइन किया गया है, ऐसे लाेगों की संख्या क्वारेंटाइन सेंटरों में 2506 पहुंच चुकी है।
20 श्रमिक स्पेशल ट्रेन में दुर्ग लौट चुके हैं 2661 लोग
दुर्ग स्टेशन में 12 मई को पहली श्रमिक स्पेशल ट्रेन आई। उसके बाद से लगातार प्रवासी मजदूरों को लेकर ट्रेनें आ रही है। रेलवे के मुताबिक अब तक 20 स्पेशल ट्रेनें दुर्ग स्टेशन में आ चुकी है और उसमें दुर्ग संभाग के 2661 लोग यहां पहुंचे हैं। आने वाले दिनों में 11 और श्रमिक स्पेशल ट्रेन आने की सूचना है जिसमें 1400 श्रमिक आ सकते हैं। इस हिसाब से यहां प्रवासी मजदूरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आगे भी इस ट्रेन से मजदूरों को लाया जाएगा।
वापस आने वालों की जुबानी कहानी
सेक्टर 4 निवासी छात्रा दीपिका त्रिवेंद्रम में जॉब करती हैं। वे बताती हैं कि लॉक डाउन के बाद यहां आने के लिए पुलिस स्टेशन के कई चक्कर कांटे। तब जाकर उनसे फार्म भरवाया गया और यह ट्रेन मिली। उन्होंने बताया कि कई ऐसे मजदूरों को रास्ते में देखा जो पैदल ही सफर कर रहे थे।



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दुर्ग स्टेशन में श्रमिक स्पेशल ट्रेन में लगातार मजदूरों के आने का सिलसिला जारी है।


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