देश में काेराेना मरीजों की संख्या में एकाएक बढ़ोतरी चाैंकाने वाली है। लेकिन, अभी यह मरीजाें की चरम संख्या नहीं मानी जा रही। यानी अाने वाले दिनाें में यह अांकड़ा अाैर बढ़ सकता है। दिल्ली एम्स के निदेशक प्रो. रणदीप गुलेरिया के अनुसार, भारत में मई के आखिरी या जून के पहले सप्ताह में कोविड-19 चरम पर पहुंच सकता है। लॉकडाउन के कारण अभी मरीज बढ़ने की दर कम रही है। दूसरी तरफ, एम्स के ही कम्युनिटी मेडिसिन के प्रो. संजय राय कहते हैं कि अभी इसी रफ्तार से मरीजों की संख्या बढ़ती रहेगी। लेकिन, सितंबर से अक्टूबर माह में मरीजाें की सबसे ज्यादा संख्या आ सकती है।
वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा िक कोविड-19 चरम पर कब जाएगा, यह इस बात पर निर्भर है कि हम सब मिलकर इस बीमारी से कैसे निपटते हैं। वहीं, आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. आर. गंगाखेड़कर के मुताबिक प्रवासी मजदूराें की घर वापसी के बाद पैदा हाेने वाले हालात पर काफी कुछ निर्भर करेगा। उन्हाेंने कहा कि अब प्रवासी मजदूर घर भेजे जा रहे हैं। इसका प्रभाव आने वाले दिनों में पता चलेगा। यदि इनमें संक्रमण नहीं फैला और हालात अच्छे से नियंत्रित कर लिए गए ताे मरीजों का माैजूदा ट्रेंड जारी रहेगा। अगर इनमें संक्रमण फैल गया तो आगे के हालात पर कुछ भी कहना मुश्किल है।
राज्यों में लाैटने वाले मजदूरों की बड़े पैमाने पर जांच जरूरी: सुजाता राव
पूर्व स्वास्थ्य सचिव सुजाता राव ने बताया कि सरकार पहले दिन से कह रही है कि बचाव का सबसे अच्छा तरीका सोशल डिस्टेसिंग है। मजदूर बड़ी संख्या में घर लाैट रहे हैं। राज्यों में शायद ही इतनी बड़ी आबादी को क्वारेंटाइन में रखने की व्यवस्था होगी। सभी लोगों की जांच भी संभव नहीं है। सिर्फ थर्मल स्कैनिंग से कोई फायदा नहीं। अधिक से अधिक जांच करने पर ही हालात नियंत्रण में किए जा सकते हैं।
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