शहर से लगे हाइवे और बाइपास सड़कों पर पैदल चलते श्रमिक दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दूसरे राज्यों से पैदल आ रहे छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को उनके गांव तक और दूसरे प्रदेश के पैदल गुजर रहे श्रमिकों को राज्य की सीमा तक छोड़ने के लिए बसों का प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। आरटीओ ने 20 बसें तो तैयार कर दीं लेकिन इनमें डीजल कौन भरवाएगा इसका तय नहीं था इसलिए ट्रांसपोर्ट नगर में जशपुर, बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगाल के 50 श्रमिकों ने लगभग 4 घंटे तक इंतजार किया और आखिर में पैदल ही निकल गए। इनमें रायपुर और दूसरी जगह से बसों के जरिए इनको भेजा गया था।
सोमवार को मजदूरों के लिए बसों की व्यवस्था हुई। आरटीओ ने जिले में 20 बसें इकट्ठा कर तहसीलों में भिजवा दीं। लेकिन कहीं भी बस से मजदूरों को बॉर्डर या गांव तक ले जाया नहीं जा सका। मजदूर बस स्टैंड और चौक चौराहों, सड़क किनारे बने पुलिस सहायता केंद्र में बसों का इंतजार करते रहे। तहसीलदार और तमाम अफसर एक दूसरे का मुंह देखते रहे, आखिर में कहा कि शासन से निर्देश नहीं हैं कि डीजल कौन भरवाएगा। ट्रेनों से आए मजदूरों को लाने वाली बसों का पूरा खर्च श्रम विभाग और सहयोगी संस्था सन्निर्माण कर्मकार कल्याण को करना है। लेकिन जिले के बॉर्डर से दूसरे बॉर्डर तक या प्रदेश के मजदूरों को गांव तक पहुंचाने वाली बसों के खर्च की जिम्मा किसी को नहीं दिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर नंगे पांव धूप में चल रहे मजदूर और उनके बच्चों को चप्पल देने के निर्देश भी दिए थे। जिले में इसका भी पालन नहीं हुआ। हालांकि कुछ समाजसेवी चप्पल बांटने के लिए पुलिस से बात कर पहल कर रहे हैं।
समाजसेवियों की मदद से पुलिस करा रही भोजन
नौकरी या रोजगार छूटने, पैसे नहीं होने पर भूखे-प्यासे चलते श्रमिकों के जख्मों पर पुलिस जरूर थोड़ा मरहम लगा रही है। समाजसेवियों की मदद से जिले म 20 चेकपोस्ट और कुछ प्वाइंट्स पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों ने कर्मवीर सहायता केंद्र खोला है। बॉर्डर से पैदल आने वाले प्रदेश और दूसरे राज्यों के श्रमिकों को सहायता केंद्रों पर रोककर पानी और नाश्ते की व्यवस्था की जा रही है। थ खाली गुजर रहे ट्रकों या गाड़ियों में इन लोगों को लिफ्ट दिलाकर कुछ दूर या इनके गांव तक छुड़वाया जा रहा है। एसपी संतोष सिंह कहते हैं, इससे कुछ तो राहत मिलेगी।
तीन घंटे तक बैठे रहे
जशपुर कुनकुरी के सतीश राम ने बताया कि नागपुर में कंस्ट्रक्शन कंपनी पर काम करीब 9 लोग काम करते थे, लेकिन काम बंद होने के बाद नागपुर से रायपुर ट्रक में आए और रायपुर से बस पर रायगढ़ पहुंचे। पुलिसवालों ने कहा कि बस मिलेगी, इंतजार करिए। तीन घंटे तक बैठे रहे, पर बस नहीं पहुंची। दोपहर 1 बजे तक सारंगढ़ बस स्टैंड पर गाड़ी का इंतजार करते रहे। पुलिसवालों ने उनके भोजन का इंतजाम किया था।
आइसक्रीम बेचने वाले साइकिल से हुए रवाना
यूपी के झांसी के मो. नासीर ने बताया कि 12 मजदूर बच्चों के साथ झांसी से रायगढ़ आईसक्रीम बेचने के लिए आए थे, लेकिन पिछले 2 माह से कोई धंधा नहीं हुआ तो अब सोमवार को घर वापस जाने के लिए निकल पड़े। कोतरा रोड थाने में पुलिस वालों ने रुकवाया और भोजन कराया इसके बाद काफी समय तक बस का इंतजार करते रहे लेकिन कोई गाड़ी नहीं मिली तो अपने प्रदेश जाने के लिए खाली ट्रक खोजते रहे।
20 लाख रुपए मिले
मजदूरों के रजिस्ट्रेशन और विभिन्न योजनाओं को चलाने के लिए श्रम विभाग के संन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल से कई योजनाएं चलाती है। श्रमिकों के लिए कोरोना को लेकर संन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने श्रम विभाग को करीब 20 लाख रुपए दिए गए हैं, लेकिन यह राशि श्रमिकों के लिए कौन से मद पर खर्च करना है, इसका निर्देश नहीं इसलिए खर्च ही नहीं कर रहे हैं।
बिलासपुर से बस से आए
बंगाल के मालदा जिले के 19 मजदूर कवर्धा से बिलासपुर पैदल पहुंचे, बिलासपुर से उन्हें बस से रायगढ़ छोड़ा गया। रायगढ़ में 4 घंटे तक मजदूर ट्रांसपोर्ट नगर बस स्टैंड पर बसों का इंतजार करते रहे, पर बस नहीं आई तो पैदल ही शहर के लिए निकल गए। मजदूर तफीजुल ने बताया कि कवर्धा में कंस्ट्रक्शन साइड पर मजदूरी का काम करते थे, काम बंद हुआ तो सभी अपने घर के लिए निकल गए। अब पैदल सफर करना पड़ रहा है।
गाइड लाइन के अनुसार की जाएगी व्यवस्था
"राज्य सरकार ने श्रमिकों को भोजन और चप्पल देने के लिए कहा गया है। इसके अलावा कुछ जरूरी सामान चाहिए होगा श्रमिकों की मदद की जानी है। सरकार ने इसकी व्यवस्था करने के लिए जिला प्रशासन को कहा है, इसमें सभी को मिलकर काम करना है। बसों की व्यवस्था के लिए आरटीओ और एसडीएम को अधिकृत किया गया है।''
-ऋचा प्रकाश चौधरी, सीईओ, जिला पंचायत
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2ZfYYGp
via
Comments
Post a Comment