कोविड-19 के फैलाव से अभी भी ये जिला अप्रभावित है। जबकि यह जिला सीधे तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा से जुड़ा है। अभी तक जिले में एक भी पाॅजिटिव केस सामने नहीं आए हैं। इधर बाॅर्डर पर बसे तारलागुड़ा और तिमेड़ पर प्रशासन ने शुरू से ही लोगों की आवाजाही पर सख्ती बरती हुई है।
सूत्रों की मानें तो अब तक इस जिले में सात हजार से भी अधिक लोग महाराष्ट्र और तेलंगाना से आ चुके हैं और इनमें से आधे लोगों का 28 दिनों की क्वारेंटाइन की अवधि भी खत्म हो चुकी है। इनमें से तो करीब 2800 लोग केवल बीजापुर ब्लाॅक में ही हैं। हर ब्लाॅक में बीएमओ कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। इस रूम में हमेशा तीन से चार लोग रहते हैं और वे क्वारेंटाइन में रखे गए लोगाें, सरपंच, सचिव, मितानिन आदि से संपर्क में रहते हैं। बताया गया है कि जिले से अब तक मेकाज जगदलपुर में करीब 160 सैंपल भेजे गए थे। इनमें से 60 सैंपल की रिपोर्ट आ गई है सभी निगेटिव पाए गए हैं बाकी रिपोर्ट आना बाकी है।
आश्रम में ठहराए गए हैं 90 लोग : जिले में इस समय सबसे संवेदनशील ब्लाॅक भोपालपटनम को माना गया है। क्योंकि इससे दो राज्यों की सीमा छूती हैं। बताया गया है कि हैदराबाद से 21 अप्रैल को पैदल निकले कालाहांडी व ओडिशा के 21 मजदूर शनिवार को भोपालपटनम पहुंचे। इन्हें बालक छात्रावास में रुकवाया गया है। इन लोगों के समेत मध्यप्रदेश के करीब 90 श्रमिकों को यहां रखा गया है। प्रशासन की ओर से इनके राशन की व्यवस्था की गई है।
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