जिले के बैंकों में करीब 150 करोड़ रुपए से अधिक की राशि नॉन परफॉर्मिंग असेट्स (एनपीए) हो चुकी है। मतलब लोन की इस रकम का रिपेमेंट नहीं हुआ है। इसमें प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना, मुद्रा स्कीम, सरकारी स्कीम के तहत दिए गए लोन की राशि शामिल है। अब कोरोना संकट काल में एमएसएमई यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को खड़ा करने के लिए केंद्र सरकार ने राहत पैकेज दिया है। इसकी गाइडलाइन हालांकि अभी बैंकों को मिली नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि पहले से लोन में रुपए डूबा चुके बैंक बड़ी सावधानी से एमएसएमई सेक्टर को लोन देंगे।
केन्द्र सरकार ने एमएसएमई सेक्टर में मध्यम उद्योगों में अब 100 करोड़ के टर्नओवर वाले उद्योगों को भी शामिल किया है। ऐसे उद्योगों को भी ऋण दिया जाएगा जो एनपीए हो चुके हैं। पिछले वर्षों में सबसे ज्यादा एनपीए की राशि 33 करोड़ 77 लाख रुपए ग्रामीण बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 25 करोड़ 83 लाख रुपए है। बैंक अफसरों कहना हैं कि छोटे उद्यम के लिए लोग ऋण लेते हैं, ऋण लेने के छह से सात माह तक रेग्युलर किस्त देते हैं लेकिन बाद में रिपेमेंट नहीं करते हैं। ग्रामीण बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में एनपीए की राशि अधिक है। अब 25 करोड़ रुपए तक के कर्जदारों को भी लोन दिया जाएगा।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में सबसे ज्यादा एनपीए
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में सबसे ज्यादा एनपीए है। क्षेत्रीय प्रबंधक जगन्नाथ साहू ने बताया कि पीएमईजीपी में करीब 20 फीसदी, मुद्रा और सरकार सहायता प्राप्त फंड में करीब 30 फीसदी राशि एनपीए में है। तीन-चार वर्षों से इन लोंस की वसूली नहीं हो सकी है। अब एमएसएमई सेक्टर के नियमों बदलाव किया गया है। इसके बाद अब छोटे से बड़े उद्यमियों को ऋण देना है।
ग्रामीण बैंक में 16 करोड़ रुपए एनपीए
छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय अधिकारी राजेश अग्रवाल ने बताया कि करीब 16 करोड़ रुपए की राशि एनपीए यानि नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स है। इसमें करीब 4.34 करोड़ रुपए की राशि मुद्रा, पीएमईजीपी जैसे सरकार से अनुदान प्राप्त ऋण योजनाओं के हैं।
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