राजनांदगांव के मदनवाड़ा में हुए मुठभेड़ में मारे गए चार नक्सलियों में एक अशोक का शव उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। शव की शिनाख्ति करते हुए अशोक के छोटे भाई गंगदेव हुर्रा ने कहा कि 14 साल में तीसरी बार बड़े भाई को देखा। रात में ही शव कांकेर के एड़ानार थाना ताड़ोकी लाया गया। अन्य तीन नक्सलियों के परिजनों का अब तक पता नहीं चल सका है। पुलिस उनके परिजनों का इंतजार कर रही है।
शुक्रवार 8 मई की रात मदनवाड़ा के जंगल में हुई मुठभेड़ में पुलिस ने चार नक्सलियों को मार गिराया गया था। जिसमें तीन की पहचान कांकेर के निवासी होने के रूप में की गई थी। चारों नक्सलियों का नाम और किस जिले के निवासी है इसकी तो जानकारी हो गई। लेकिन स्पष्ट पता सिर्फ नक्सली अशोक का सामने आया था। जिसमें उसकी शिनाख्त कांकेर राजनांदगांव बार्डर डिवीजन कमेटी सदस्य अशोक उर्फ रैनू हुर्रा उम्र 35 वर्ष निवासी एड़ानार थाना ताड़ोकी जिला कांकेर के रूप में की गई थी। सूचना पर परिजन रविवार शाम शव लेने राजनांदगांव पुलिस के पास पहुंचे। शव लेने अशोक के छोटा भाई गंगदेव हुर्रा के अलावा गांव का सरपंच श्याम लाल पोटाई व अन्य कुछ लोग पहुंचे थे। जिनसे शव की एक बार फिर से शिनाख्त कराई गई। अशोक के भाई ने बताया 14 साल पहले वह नक्सलियों के साथ चला गया था। जिसके बाद वह नहीं वापस नहीं लौटा। इन 14 साल में दो बार ही वह घर आया था।
पिता की मौत में नहीं पहुंचा था अशोक
गंगदेव हुर्रा ने बताया 20 की उम्र में ही अशोक घर छोडक़र नक्सलियों के साथ चला गया था। परिवार के लोगों ने उसे बंदूक छोडऩे बहुंत समझाया लेकिन वह नहीं माना। साल भर पहले जब पिता की मौत हुई तो उस तक खबर पहुंचाने बहुंत कोशिश की गई। लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। अब मुठभेड़ में मारे जाने की खबर मिली।
बहन मुखबिरी केआरोप में जेल में है बंद
अशोक हुर्रा तीन भाई एक बहन हैं। मंझला बलदेव हुर्रा बोर गाड़ी में झांसी में काम करता है। सबसे छोटा गंगदेव गांव में खेती बाड़ी करता है। वहीं बहन सुमारी हुर्रा पिछले चार साल से जेल में बंद है। उसे कांकेर पुलिस मुखबिरी के आरोप में गिरफ्तार की थी। तीन भाई और बहन में किसी भी शादी नहीं हुई है। मां की गंगदेव के बचपन में ही मौत हो चुकी है।
तीन के परिजनों को तलाश रही पुलिस
मुठभेड़ में मारे गए अन्य तीन नक्सलिय की शिनाख्त एरिया कमेटी सदस्य कृष्णा नरेटी 26 वर्ष निवासी कांकेर, महिला नक्सली मोहला औंधी संयुक्त एलओएस की सदस्य सविता सलामे 25 साल निवासी कांकेर तथा परमिला 22 साल निवासी दक्षिण बस्तर के रूप में की गई है। इन सभी की मदनवाड़ा इलाके में नक्सली संगठन में इनके साथ काम कर चुके आत्मसमर्पित नक्सली पहाड़सिंग ने शिनाख्त की है। लेकिन अशोक के परिजन व ग्रामीण उन्हें नहीं पहचान पाए। पुलिस इनके परिजनों की तलाश कर रही है। पुलिस का कहना है कि दो दिन और परिजनों का इंतजार किया जाएगा। इसके बाद पुलिस तीनों का अंतिम संस्कार कर देगी।
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