जरूरी नहीं कि सिर्फ जन्म देने वाली मां के अंदर ही ममता होती है, बच्चों के लिए ममता हर महिला के अंदर छिपी होती है।नवजात के लिए कुछ ऐसी ही ममता दंतेवाड़ा जिला अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में देखने को मिलती है। यहां 24 घंटे शिशुओं की किलकारियां गूंजती रहती हैं और इन्हीं विशेष नवजातों की देखभाल के लिए 24 घंटे तत्पर रहकर मां की भूमिका निभाती हैं यहां की 11 नर्सें। ये ड्यूटी कब ममता व जुड़ाव में बदल जाती हैं, इन्हें खुद को पता नहीं चलता। दरअसल, प्री-मैच्योर बेबी को स्वस्थ्य करने की जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर होती है। रोने की आवाज सुनकर दौड़ी चली आती हैं, सीने से लगाकर ममता न्योछावर करती हैं।
बच्चे का जन्म इन्हीं नर्सेस के हाथों में होते हैं। मां की भूमिका तब तक अदा करती हैं जब तक ये विशेष नवजात पूरी तरह से स्वस्थ्य न हो जाएं। ये सिर्फ नवजातों की मां नहीं बनती, बल्कि बच्चों की मां की भी देखभाल करती हैं। नोडल अधिकारी डॉक्टर राजेश ध्रुव कहते हैं इनके कामों को मैंने करीब से देखा है। ये सिर्फ ड्यूटी नहीं जिम्मेदारी समझकर काम करती हैं, विशेष नवजातों की मां बनकर देखभाल करती हैं।
3 साल में इतने बच्चे आए
- 2017- 39
- 2018- 535
- 2019- 358
- 2020- 161
ऐसे करती हैं देखभाल
यहां ऐसे बच्चे रखे जाते हैं जिनका जन्म 9 महीने से पहले हो गया हो। यूनिट की नर्सेज के सामने चुनौती इस बात की होती है कि प्री-मेच्योर बेबी को स्वस्थ्य कैसे करना है। इस वक़्त तो जन्म देने वाली मां भी साथ नहीं होतीं और न ही परिवार का कोई भी सदस्य। सही फीडिंग के तरीके मां को बताती हैं। शिशुओं का पोषण मदर मिल्क पर ही टिका होता है, ऐसे में समय का पूरा ख्याल रखती हैं।ट्यूब फीडिंग, स्पून फीडिंग या फॉर्मूला फीडिंग भी कराती हैं।
तसल्ली यह कि सालभर संपर्क में रहते हैं
यूनिट की इंचार्ज सीनियर नर्स ममता पॉल हैं। इनके अलावा उर्मिला साहू, मधु साहू, गीतांजलि, मीनाक्षी साहू, सीमा साहू, सुनीता लहरे, त्रिवेणी सिन्हा, रानू रामटेके, रश्मि चक्रधारी, सोनिका कश्यप हैं। ये सभी बताती हैं बच्चों का केयर करना बड़ी चुनौती होती है। इनकी देखभाल करते करते जुड़ाव बहुत ज़्यादा हो जाता है। तब तक नहीं छोड़ते हैं जब तक बच्चे का वजन 1500 ग्राम से ज़्यादा न हो जाए। इन शिशुओं के साथ जुड़ाव काफी अच्छा लगता है। बच्चे जब कई कई दिन रह लेते हैं तो काफी जुड़ाव हो जाता है। भेजते वक्त मन भर आता है। लेकिन तसल्ली इस बात की होती है कि सालभर तक हम बराबर संपर्क में रहते हैं।
तीन साल पहले हुई थी शुरुआत
जिले में एनएमडीसी सीएसआर मद से 3 साल पहले स्पेशल न्यूबॉर्न चाइल्ड यूनिट की शुरुआत हुई थी। यहां 4 डॉक्टर्स के साथ 11 नर्सें भी हैं। अब तक 1000 से ज्यादा विशेष नवजात बच्चे यहां भर्ती किए जा चुके हैं। इनमें से कुछ बच्चों को रेफर भी किया गया। जबकि कई स्वस्थ्य होकर घर लौटे हैं। पहले ऐसे मामले जगदलपुर भेजे जाते थे।
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