प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में दुर्ग जिले के बार्डर पार कर रहे हैं। शनिवार को बाफना टोल प्लाजा के पास मुंबई से किराए पर ट्रक करके 60 मजदूरों को ट्रक छोड़कर भागने लगा। ये सभी मजदूर मुंबई से ओडिशा जा रहे थे। इधर दुर्ग-भिलाई औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज करने वाले 570 प्रवासी मजदूरों ने गांव वापस लौटने के लिए अपने प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है। झारखंड सरकार ने भिलाई के 155 प्रवासी मजदूरों को ले जाने के लिए बसें रवाना की है जो शनिवार देर रात यहां पहुंचेगी।
दुर्ग बायपास से रोजाना हजारों लोग पैदल, ट्रकों में या फिर साइकिल से गुजर रहे हैं। यह मार्ग नेशनल हाइवे का है इसलिए मुंबई, दिल्ली, पूणे जैसे बड़े शहरों से लोग अपने गांव लौट रहे हैं। श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने के बाद यहां दूसरे राज्यों से लोग लौट रहे है और 1151 श्रमिक पैदल या दूसरे वाहनों से लौट चुके हैं। इधर प्रशासन का दावा है कि अन्य राज्यों से लौटे मजदूरों को क्वारेंटाइन करा रहे हैं।
आज झारखंड जाएंगे 155 मजदूर
भिलाई दुर्ग में झारखंड के सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर हैं। 250 मजदूरों को यहां से वहां की सरकार वापस ले गई है और बचे हुए 155 मजदूरों को लेने के लिए शनिवार देर रात बस यहां पहुंचने वाली है। इन मजदूरों के अलावा बिहार, ओडिशा व एमपी के मजदूरों ने वापसी के लिए गुहार लगाई है।
2944 मजदूर आना चाहते हैं दुर्ग
दुर्ग जिले के 2944 लोग हैं जो अन्य राज्यों में फंसे हैं और यहां आना चाहते हैं। इन लोगों ने प्रदेश सरकार की वेबसाइट में वापसी के लिए अपना पंजीयन करवाया है। इस पंजीयन करवाने वाले में केवल 30 लोग ही ट्रेनों से लौटे हैं। वहीं 1154 लोग गांवों में पैदल या फिर दूसरे साधनों से गांव पहुंच है।
मजदूरों ने कहा-महराष्ट्र में मदद मिलती तो लौटते नहीं
मजदूरों ने बताया कि नवी मुंबई से ट्रक को किराए पर लिए। हर मजदूर 4000 रुपए दिए हैं। उन्हें ओड़िशा पहुंचाने का वायदे के साथ ये पैसे दिए लेकिन यहां टोल पर ही छोड़ दिया। रेड जोन मुंबई से ट्रेन चल नहीं रही है इसलिए बड़ी संख्या में वहां से प्रवासी मजदूर उनकी तरह ट्रक किराया कर निकले हैं। मजदूरों ने बताया कि उन्हें अगर महाराष्ट्र में ही मदद मिल जाती तो वे अपने घर नहीं लौटते।
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