सीटू राज्य कमिटी सदस्य संजय पासवान ने कहा कि प्रवासी मजदूर अपने ही देश में गुलाम की जिन्दगी जीने को मजबूर है । उन्होंने कहा कि एक देश मे दो देश बन गया है, एक तरफ इंडिया है, जहाँ 10 प्रतिशत लोग रहते हैं, जिसके लिए सारी सुविधाएं है। वहीं दूसरी तरफ भारत है जहां 90 प्रतिशत आबादी रहता है, जो तड़प रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में मेहनतकश वर्ग के 93 प्रतिशत लोग अत्यंत गरीबी में जीवन बसर करने वाले असंगठित क्षेत्र के मजदूर हैं। उन्होंने कहा कि आज इन करोड़ों गरीब मजदूरों को भूख-प्यास से मरने के लिए छोड़ दिया है। और इस अभूतपूर्व संकट में प्रधानमंत्री के भाषणों में तड़पते भारत के लिए चिंता के शब्द गायब है। उन्होंने कहा कि विदेशों से भारतीयों को प्लेन से वापस लाने की व्यवस्था की गई, तीर्थ यात्रियों को गुजरात, आंध्र प्रदेश, पंजाब भेजा गया। वहीं कोटा में पढ़ रहे संपन्न घर के छात्रों को कई राज्यों ने वापस लाया, लेकिन देश में मजदूरों को इस भारत का निर्माण करता है को अपने घर जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
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