हिंदपीढ़ी में मंगलवार शाम एक 24 वर्षीय युवक किशोर कुमार की मौत हो गई। परिजनों व परिचितों का कहना है कि उसे दो दिनों से हल्का बुखार, छाती में दर्द और सांस लेने में तकलीफ थी। यही नहीं, युवक और उसके परिवार की चार दिन पहले स्क्रीनिंग की गई थी। युवक गुरुनानक स्कूल में चतुर्थ वर्गीय पद पर काम करता था। मंगलवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत पर परिजन उसे पहले गुरुनानक अस्पताल ले गए। वहां डाॅक्टरों ने उसे क्वारेंटाइन करने के लिए रिम्स ले जाने की सलाह दी। मगर परिजन उसे सदर अस्पताल ले गए।
वहां डाॅक्टरों के कहने पर 11.30 बजे घर आगए। शाम तक युवक की हालत बिगड़ गई और करीब 6:30 बजे उसकी मौत हो गई। सिविल सर्जन डाॅ. विजय बिहारी प्रसाद ने बताया कि उन्हें शाम में एक व्यक्ति की मृत्यु की सूचना मिली है। शव काे मंगाकर इसकी जांच की जाएगी। इधर, मंगलवार देर रात प्रशासन ने उस गली को सील कर दिया है जहां युवक का घर है। यहां पुलिस भी तैनात कर दी गई है।
दो-तीन दिन से था हल्का बुखार और छाती में दर्द
गुरुनानक स्कूल के पीछ लाह फैक्ट्री राेड के समीप मृतक युवक का घर है। पूरे परिवार की चार दिन पहले स्क्रीनिंग हुई थी। तब तक ये बात सामने नहीं आई। किशोर के छाेटे भाइ बाॅबी ने बताया कि पहले से कोई बीमारी नहीं थी, लाॅकडाउन हाेने से पहले उसने जिम ज्वाइन की थी जिससे शरीर में थाेड़ा दर्द था, बीस दिन पहले से चेहरे में सूजन हुइ थी, दाे दिन पहले पैर में हल्का सूजन शुरू हुआथा जाे मंगलवार काे काफी बढ़ गया था। अस्पताल से आने के बाद भी वह ठीक था। शाम में जब वह नहीं उठा तब हमें पता चला।
लक्षण थे...मगर प्रशासन ने नहीं दिखाई तत्परता
स्कूल कमेटी के सदस्याें ने बताया कि एक निजी एंबुलेंस से कमेटी के ही कुछ लाेग युवक को गुरुनानक अस्पताल ले गए थे। जांच में पता चला कि युवक काे दाे-तीन दिन से हल्का बुखार, पांव में सूजन, छाती दर्द तथा सांस लेने में कठिनाई हाे रही है। लक्षणों के कारण गुरुनानक अस्पताल ने मरीज काे रिम्स ले जाने काे कहा। इसके बाद जानकारी एडीएम काे दी गई। एडीएम के कहने पर पहले हिंदपीढ़ी में ही इलाज कर रहे डाक्टर काे दिखाया। डॉक्टर ने गुरुनानक अस्पताल में ही इन्हें एक अलग वार्ड में क्वारेंटाइन करने की बात कही, पर वहां ऐसी व्यवस्था नहीं हाेने के कारण ये लाेग सदर अस्पताल चले गए। वहां डॉक्टरों ने मरीज कोदेखा, दवाएं दी और कहा घर में ही रहें। दर्द बढ़े ताे दाे दिन बाद फिर आना। मामले की जानकारी रांची के सिविल सर्जन डाॅ. विजय बिहारी प्रसाद काे भी दिन में दी गई थी। उन्हाेंने कहा कि इंतजार करें एंबुलेंस की व्यवस्था करते हैं, पर कोई मदद नहीं मिली।
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