अक्षय तृतीया पर रविवार को बाबा बासुकीनाथ मंदिर में फौजदारी बाबा का विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। महादेव को विभिन्न उपचारों से पूजा अर्चना करने के बाद फूलों से श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर अक्षय तृतीया को लेकर बाबा बासुकीनाथ को शीतल जल और नानाविध अन्न- नैवेद्य निवेदित किए गए। कोरोना वायरस के संक्रमण की संभावना को लेकर बाबा बासुकीनाथ मंदिर विगत 20 मार्च से ही लॉकडाउन है। फौजदारी बाबा के मंदिर में रविवार को तालाबंदी का 37 वां दिन है। इस दौरान बासुकीनाथ मंदिर के पुजारी सुरक्षा गार्ड तथा दैनिक रूप से पूजा पाठ में नियमित सहयोग करने वाले सहयोग कर्मियों के अलावा अन्य श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह निषेध है।
ऐसे में बाबा बासुकीनाथ मंदिर का परिसर पूरी तरह विरान पड़ा है। यहां ना तो लोग डाउन से पूर्व के तामझाम और श्रद्धालुओं की भीड़ कहीं दिखाई देती है और ना ही धार्मिक अनुष्ठान। फौजदारी दरबार में बाबा की नियमित पूजा जारी है। प्रात: बाबा बासुकीनाथ मंदिर खुलने के बाद मंदिर प्रशासन से अनुमति प्राप्त गिने चुने लोग महादेव की पूजा में भाग लेते हैं। सुबह सरकारी पुरोहित पूजा के बाद दोपहर को दिवा कालीन विश्राम पूजा और रात्रि कालीन नियमित श्रृंगार का अनुपालन परंपरा अनुसार किया जा रहा है। बांग्ला वैशाख मास शुरू होने पर महादेव के गर्भगृह में शिवलिंग के ऊपर पांच घड़े नियमित रूप से अखंड अभिषेक के लिए लगाया गया है। परंपरा अनुसार जिसे यहां के 5 समुदाय के लोगों द्वारा दैनिक रूप से घड़ा भरकर एक माह पर्यंत अखंड जलाभिषेक के लिए लगाया गया है। अक्षय तृतीया पर बाबा बासुकीनाथ मंदिर में महादेव की विधि-विधान से पूजा की और महादेव का फूलों से भव्य श्रृंगार किया गया।
बासुकीनाथ में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर मना अक्षय तृतीया
लॉकडाउन के दौरान श्रद्धालुओं ने अपने अपने घरों में रहकर अक्षय तृतीया का त्यौहार मनाया। बासुकीनाथ मंदिर में ताला लगा हुआ है। लॉक डाउन के कारण दूरस्थ और स्थानीय श्रद्धालु पूजा अर्चना तथा दान पुण्य के लिए बासुकीनाथ मंदिर नहीं आ पाए। कोरोना के संक्रमण से सुरक्षा का ध्यान रखते हुए लोगों ने अपने-अपने घरों में अक्षय तृतीया पर धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा अर्चना की। लॉक डाउन के दौरान श्रद्धालुओं ने घरों से ही अपने पुरोहितों को यथासंभव अक्षय तृतीया के अवसर पर ऑनलाइन दान दक्षिणा दी। किया। इस विशिष्ट तिथि पर स्थानीय भक्तों द्वारा बासुकीनाथ के धरनार्थियों व भक्तों के बीच महाप्रसाद वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने पुरोहितों को घर में भोजन करा कर जल से भरा घड़ा, पंखा, नगद दक्षिणा एवं टोकरी में अन्न, मिठाई, फल आदि भरकर अपने दान किया। लोगों ने अपने घरों में कुंवारी कन्या को भोजन कराया। कहा जाता है कि अक्षय तृतीया को किये गये पुण्य का फल कभी क्षय नहीं होता। इस तिथि को किया गया पुण्य अक्षय रहता है।
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