काेराेना वायरस से संक्रमित मरीजाें काे बचाने के लिए डाॅक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी अपनी जान की परवाह किए बिना जुटे हुए हैं। लेकिन उन्हें पर्याप्त संख्या में पर्सनल प्राेटेक्टिव किट (पीपीई) नहीं मिल पा रहा है। इससे काम में बाधा आरही है। ऐसे में रिम्स ने खुद ही पीपीई बनाना शुरू कर दिया है। अब तक 13 पीपीई किट तैयार हाे चुके हैं। पीपीई किट की कमी काे देखते हुए रिम्स अधीक्षक डाॅ. विवेक कश्यप, उपाधीक्षक डाॅ. संजय कुमार और टास्क फाेर्स ने दाे अप्रैल काे खुद इसे बनाने का फैसला लिया। इसके लिए जरूरी सामान बेंगलुरू से मंगाए गए। चार अप्रैल काे डिजायन फाइनल हुआ। इसके बाद रिम्स के टेलर विमल कुमार वर्मा औरपुष्पा कुमारी ने इसे तैयार करना शुरू कर दिया। महज दाे दिन में ही 13 पीपीई तैयार हाे गए।
वायरस से सुरक्षा करने में सक्षम
टास्क फाेर्स टीम के डाॅ. निशीद एक्का ने बताया कि यह पीपीई पूरी तरह से वायरस से सुरक्षा करने में सक्षम है। काेराेना हवा के माध्यम से फैलता है। इसलिए यह पीपीई इस तरह से बनाई गई है कि इसमें हवा नहीं जाएगी। पाॅजिटिव मरीजाें के सीधे संपर्क में आने वाले डाॅक्टराें काे छाेड़कर अन्य सभी नर्साें और स्वास्थ्यकर्मियाें काे ये किट दिए जाएंगे। इससे रिम्स में पीपीई की समस्या का काफी हद तक समाधान हाे जाएगा। डाॅ. निशीद एक्का ने बताया कि रिम्स में जल्दी ही सेनिटाइजर चैंबर भी बनाया जाएगा। यह चैंबर किस कंपनी से बनवाया जाएगा, इस पर रिम्स प्रबंधन बुधवार काे फैसला लेगा। उन्हाेंने कहा कि चैंबर में डिस-इंफेक्शन फाॅग बना रहेगा। इस चैंबर के अंदर जाते ही शरीर के सभी संक्रमण खत्म हाे जाएंगे।
रेनकाेट के मैटिरियल से बनाया बाॅडी मास्क
डाॅ. निशीद एक्का ने बताया कि पीपीई किट में इस्तेमाल हाेने वाला ग्लब्स, और गाॅगल्स हमारे पास था। रेनकाेट बनाने में इस्तेमाल हाेने वाले मैटिरियल से बाॅडी मास्क और शू कवर तैयार किया। उन्हाेंने कहा कि सरकार की ओर से जाे पीपीई उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वह वाटरप्रूफ नहीं हाेता। लेकिन रिम्स में तैयार पीपीई पूरी तरह से वाटरप्रूफ है। यह डब्ल्यूएचओकी गाइडलाइन से भी बेहतर हाेगा। इसे स्क्रीनिंग करने वाले, ट्राॅलीमैन और जाे कम रिस्क वाले जाेन में रहते हैं, वे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
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