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Jharkhand daily news

जीवन में जब कोई किसी का सहारा नहीं होता है तो ऊपर वाला किसी न किसी को सहारा बना कर भेज ही देता है। बड़कागांव में भी ऐसा ही हुआ है। दो दिव्यांगों के बीच की दोस्ती की चर्चा यहां हर जगह हो रही है। दोनों पिछले कई वर्षों से अपनी दोस्ती को निःस्वार्थ रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। बड़कागांव ठाकुर मोहल्ला निवासी 60 वर्षीय लोकनाथ राणा हाथों से निःशक्त हैं तो वही 63 वर्षीय रामचंद्र राणा आंखों से निःशक्त हैं। पिछले 30 वर्षों से दोनों की दोस्ती चली आ रही है। आज लोकनाथ राणा की आंखें और कंधा रामचंद्र राणा के लिए पग-पग पर दीप प्रज्वलित कर मार्ग प्रदर्शित कर रहा है। रामचंद्र राणा के लिए सहारा बना हुआ है। दोनों में ऐसी मित्रता है कि दोनों का खाना-पीना, चलना-फिरना मार्केटिंग करने के अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण कार्य साथ में ही होता है। दोनों एक दूसरे की पसंद का विशेष ख्याल रखते हैं। रामचंद्र राणा लोकनाथ राणा के घर में ही परिवार के सदस्य के रूप में पिछले 30 वर्षों से रह रहे हैं।

रामचंद्र विचारों के हैं धनी, नहीं की शादी
रामचंद्र राणा हजारीबाग झंडा चौक के रहने वाला हैं। कई वर्ष पूर्व उसकी सारी जमीनें बिक गई। पूरा परिवार तितर-बितर हो गया, फिर भी उन्होंने जीवन से हार नहीं मानी। कई बार इनकी शादी के लिए कई लोगाें ने संपर्क किया परंतु उन्होंने यह कह कर शादी को ठुकरा दिया कि मैं खुद देख नहीं सकता हूं तो मैं दूसरों को क्या सुख दे पाऊंगा, मैं किसी के लिए बोझ नहीं बनना चाहता हूं।



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A friend showing path for 30 years, Sahara became another


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