जिलेवासियों को इस बार अप्रैल माह में चिलचिलाती धूप का सामना नहीं करना पड़ा। गुरुवार को अप्रैल माह का आखिरी दिन रहा। इस दिन जिले का अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 20.07 डिग्री दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में चार डिग्री कम है। यदि पांच सालों का रिकॉर्ड देखें, तो पहली बार अप्रैल माह का मौसम सबसे सुहाना रहा और अत्यधिक गर्मी का सामना नहीं करना पड़ा।
बेमौसम बारिश व लॉकडाउन की वजह से प्रदूषण नहीं होने के कारण मौसम सामान्य रहा। जिस कारण हर वर्ष अप्रैल की तीखी धूप से परेशान लोगों को इस बार राहत मिली। कृषि विज्ञान केंद्र के अटल बिहारी तिवारी द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार इस वर्ष अप्रैल में पांच सालों की अपेक्षा सबसे अधिक 51.01 एमएम बारिश हुई। हालांकि बारिश की वजह से किसानों के कुछ फसलों को फायदा, तो कुछ को नुकसान भी हुआ है। चूंकि इस वर्ष लगातार बेमौसम बारिश होती रही है। उन्होंने बताया कि अब तापमान में वृद्धि दर्ज की जाएगी, जिससे गर्मी बढ़ेगी।
नहीं हो सकी एसी, कूलर व पंखे की बिक्री, दो करोड़ का व्यवसाय बाधित : लॉकडाउन से पूर्व ही जिले के इलेक्ट्रॉनिक्स प्रतिष्ठान से जुड़े व्यवसायियों ने एसी, कूलर, पंखा, फ्रीज जैसे उपकरणों का स्टॉक जमा रख लिया था। ताकि गर्मी बढ़ने पर उन्होंने इनकी बिक्री करने में परेशानी न हो और लोगों को भी सरलता पूर्वक उपकरण मिल सके। लेकिन हुआ इसके विपरीत और लॉकडाउन की वजह से इनकी बिक्री अब तक नहीं हो सकती है। चैंबर अध्यक्ष हिमांशु केशरी ने अनुमान जताते हुए बताया कि व्यवसायियों का दो करोड़ का व्यवसाय प्रभावित हुआ है। यदि निकट समय में लॉकडाउन खुल जाता है, तो कुछ मात्रा में उपकरणों की बिक्री हो सकती है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष पड़ने वाली भीषण गर्मी को देखते हुए व्यवसायी फरवरी व मार्च के शुरूआती दिनों में ही उपकरणों का स्टॉक कर चुके थे।
शीतल पेय पदार्थ का स्टॉल लगाने वालों को नहीं मिला रोजगार : इस साल गर्मी के मौसम में दर्जनों बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिल सका। चूंकि प्रति वर्ष मौसमी व्यापार करने वाले दर्जनों लोग मार्च माह से ही जगह-जगह शीतल पेय पदार्थ, आइसक्रीम, लस्सी आदि का स्टॉल सजा चुके होते थे, जिससे उन्हें अच्छी खासी आमदनी हो जाती थी। लेकिन इस बार लॉकडाउन होने से वैसे लोगों के आय का जरिया समाप्त हो गया। हालांकि बाजार में खीरा, ककड़ी आदि की बिक्री बढ़ी है।
तालाबों-पोखरों में अब भी लबालब पानी, नहीं हुई किल्लत
हर बार देखा जाता है कि अप्रैल आते-आते जलस्रोत जवाब देने लग जाते है और चापानल, तालाब, नदी, पोखर आदि का पानी सूख जाता है। जिस कारण जिलेवासियों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है। लेकिन इस बार अभी तक पानी की समस्या उत्पन्न नहीं हुई है। तालाबों-जलाशयों में भी पानी लबालब भरे हुए है और उनका रंग भी शीशे की तरह साफ नजर आ रहा है।
पिछले साल से करीब दोगुनी हुई बारिश
| वर्ष |
बारिश एमएम में |
| 2016 |
1.7 |
| 2017 |
9.7 |
| 2018 |
30.7 |
| 2019 |
28.4 |
| 2020 | 51.1 |
पांच सालों में सबसे ज्यादा तापमान 40.5 डिग्री
| वर्ष | तापमान अधिकतम | न्यूनतम |
| 2016 |
40.50 | 24.30 |
| 2017 |
40.10 | 22.80 |
| 2018 |
37.50 | 21.50 |
| 2019 |
38.40 | 22.20 |
| 2020 | 34.00 | 20.70 |
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