पूरे देश में जहां एक ओर लॉकडाउन का पॉजिटिव इफेक्ट भी देखने को मिल रहा है। इससे लोहरदगा जिला भी अछूता नहीं है। जिले में पिछले 10 वर्षों की तुलना में इस वर्ष अप्रैल के अंतिम दौर व मई के शुरूआती दौर में भी ग्रीष्मकाल होने के बावजूद अधिकतम तापमान 32 डिग्री से कम रही। जबकि गत वर्षों में अप्रैल के शुरूआती दौर से अधिकतम तापमान 35 से 40 के बीच पहुंच जाता था।
इसपर अधिक जानकारी देते हुए कृषि वैज्ञानिक डाॅ. शंकर कुमार सिंह ने बताया कि इस वर्ष 14 और 15 अप्रैल 2020 को सबसे अधिक तापमान 30 से 32 डिग्री तापमान रहा। अन्य दिनों में अबतक अधिकतम तापमान 25 से 30 डिग्री अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान 17 से 18 डिग्री रहा। उन्होंने बताया मौसम में यह बदलाव ग्लोबल वार्मिंग का असर है। जब मौसम भी अपना अलग अलग रंग दिखा रहा है।
आगे उन्होंने कहा मौसम के 80 प्रतिशत तक साफ होने से विलुप्त होने वाली पक्षियां भी अब वापस लौटने लगी है। हालांकि उन्होंने यह भी आशंका जतायी है कि इस वर्ष देर से भी गर्मी पड़ सकती है। जिसके कारण बरसात आने में देरी हो। इधर मौसम में बदलाव के कारण ग्रीष्मकाल में भी लोगों को जहां गर्मी से राहत मिली है, वहीं पेयजलापूर्ति संकट से भी लोग दूर रहे। आगे भी पेयजलापूर्ति में लोगों को राहत मिलेगी। इसकी पुष्टि करते हुए पेयजलापूर्ति संवेदक कुमार संदीप ने बताया कि इस वर्ष रुक रुककर हुई नियमित बारिश से मई के शुरुआती दौर में भी नदियों के सतही धार में प्रचुर मात्रा में जल उपलब्ध है। जिससे ग्राउंड लेबल पर पानी की सतह सही बनी है।
जिसके कारण जिले के तीन इंटक वेल में भी प्रचुर मात्रा में जल उपलब्ध है। उन्होंने बताया 2013-14 के बाद से यह पहला ऐसा वर्ष होगा जिसमें लोगों को मई व आगे भी दो महीनों तक लोगों को पेयजलापूर्ति संकट से दूर रखा जा सकेगा। बताया कि जिले के शहरी क्षेत्र में साढ़े पांच लाख गैलन पेयजलापूर्ति की जरूरत है। जो मई में भी पूरी अलग अलग जोन में बांटकर आपूर्ति की जा रही है। लॉक डाउन में लोगों के रहने के बावजूद नदियों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध जल के कारण पेयजलापूर्ति पूरी की जा रही है।
नदियों में पूरा पानी, पेयजल की नहीं होगी दिक्कत
जिले में मई की शुरुआत होने के दौरान नदियों में पूरा जल है। यह कहा जा सकता है कि आगे आने वाले गर्मी के कुछ माह में भी हमें पेयजल के संकट से नहीं गुजरना पड़ेगा। जिले में मुख्य रूप कोयल व शंख नदी है। दोनों नदियों की सहायक सिठियो कोयल नदी, भक्सो कोयल नदी व अर्रू कोयल नदी में भी प्रचुर मात्रा में पानी है। इससे जिले में पेयजलापूर्ति होने वाली तीन इंटक वेल में ग्राउंड स्तर पर पानी उपलब्ध है।
जिले में मई की शुरुआत होने के दौरान नदियों में पूरा जल है। यह कहा जा सकता है कि आगे आने वाले गर्मी के कुछ माह में भी हमें पेयजल के संकट से नहीं गुजरना पड़ेगा। जिले में मुख्य रूप कोयल व शंख नदी है। दोनों नदियों की सहायक सिठियो कोयल नदी, भक्सो कोयल नदी व अर्रू कोयल नदी में भी प्रचुर मात्रा में पानी है। इससे जिले में पेयजलापूर्ति होने वाली तीन इंटक वेल में ग्राउंड स्तर पर पानी उपलब्ध है।
2016 से ढ़ाई और 2017 से पांच गुना पानी बरसा
| वर्ष |
बारिश एमएम में |
| 2016 |
20 |
| 2017 |
11.7 |
| 2018 |
22.8 |
| 2019 |
23.6 |
| 2020 | 52.3 |
पिछले साल से अधिकतम पारा 6 डिग्री कम रहा
| वर्ष | तापमान अधिकतम | न्यूनतम |
| 2016 |
39.20 | 26.00 |
| 2017 |
41.30 | 22.40 |
| 2018 |
39.60 | 23.50 |
| 2019 |
39.80 | 24.10 |
| 2020 | 33.10 | 20.20 |
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