कोरोना महामारी से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए जिला प्रशासन द्वारा झुमरी तिलैया स्थित जेपी अस्पताल को सुपर कोविड अस्पताल के रूप में चिन्हित किए जाने व वहां के प्रबंधक द्वारा अस्पताल के संचालन के प्रति बरती गई असहयोगात्मक रवैए के काफी दिन बाद भीे इसके संचालन को लेकर गतिरोध जारी है। उपायुक्त रमेश घोलप द्वारा लगातार इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल को टेकओवर कर विभागीय स्तर से चिकित्सक व कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। सूत्रों की माने तो प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय आपदा के रूप में घोषित किए गए कोरोना बीमारी जैसे मामले में अस्पताल के प्रबंधक द्वारा प्रशासन को सहयोग में दिखाई गई असहयोगात्मक रवैए को लेकर कार्रवाई की रूप रेखा तैयार की जा रही है। उपायुक्त के निर्देशानुसार शनिवार को भी स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों का एक दल सीएस पार्वती नाग के नेतृत्व में अस्पताल पहुंचकर प्रबंधक डाॅ. जेपीएन वर्णवाल से अस्पताल के संचालन के संबंध में पूरी जानकारी लेने की कोशिश की गई।
मौके पर सीएस के द्वारा अस्पताल के प्रबंधक से अस्पताल में विगत तीन माह से कार्यरत चिकित्सकों व कर्मियों से संबंधित उपस्थिति पंजी सहित सूचि की मांग की गई, मगर प्रबंधक के द्वारा पदाधिकारियों को चिकित्सकों व कर्मियों के कार्यरत होने से संबंधित कागजात व पंजी नहीं उपलब्ध कराई गई। जिसकी रिपोर्ट सीएस के द्वारा उपायुक्त को सौंपे जाने की बात कही गई है। वहीं जानकारी अनुसार प्रशासन स्तर से इस बात की भी जानकारी ली जा रही है कि उक्त अस्पताल के संचालन को लेकर लिए गए लाईसेंस के दौरान प्रबंधक द्वारा कितने चिकित्सकों व कर्मियों की सूचि दी गई थी। उल्लेखनीय हो कि प्रशासन द्वारा अस्पताल को सुपर कोविड अस्पताल के रूप में चिन्हित किए जाने के बाद प्रबंधक द्वारा बिना प्रशासन को सूचना दिए अस्पताल को बंद कर दिया गया था। वहीं इस बात की जानकारी मिलने पर पहुंचे प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को प्रबंधक द्वारा कोरोना बीमारी को लेकर अस्पताल के चिकित्सकों व कर्मियों द्वारा कार्य करने में असमर्थता जताई गई थी। जिसके बाद प्रशासन द्वारा अस्पताल को टेकओवर कर लिया गया था। साथ ही प्रबंधक से स्पष्टीकरण की मांग की गई थी। बाद में प्रबंधक द्वारा प्रशासन को कुछ चिकित्सकों और कर्मियों की सूचि सौंपी गई थी। साथ ही उनके द्वारा कार्य करने को लेकर कुछ शर्तें भी प्रशासन के समक्ष रखी गई थी। इस पूरे मामले में जिला प्रशासन द्वारा अस्पताल के प्रबंधक के रवैए को लेकर कानूनी कार्रवाई किए जाने को लेकर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
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