Skip to main content

Jharkhand daily news

कोरोना संकट से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। कोरोना को हराने के लिए देश में किए गए लॉकडाउन का रांची सहित झारखंड में भी जबरदस्त असर पड़ेगा। क्योंकि रांची सहित राज्यभर में फिलहाल करीब 10 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर ताला लग गया है।

इसके अलावा निजी डेवलपर्स के करोड़ों के प्रोजेक्ट के बंद होने से निर्माण क्षेत्र से जुड़ा व्यवसाय और लाखों कामगारों के रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। रांची के जाने माने ऑर्किटेक्ट राजीव चड्‌डा की मानें तो निजी क्षेत्र के कंस्ट्रक्शन व्यवसायी तो एक से दो माह में रिकवर कर लेंगे, लेकिन सरकार द्वारा संचालित प्रोजेक्ट में कुछ समय लगेगा, क्योंकि लॉकडाउन की वजह से सरकार को काफी कम टैक्स मिलेगा। कांट्रैक्टर को पैसा नहीं मिलेगा तो काम भी रुका रहेगा। एक माह बाद मानसून आ जाएगा, ऐसे में 90 फीसदी प्रोजेक्ट का काम बंद हो जाता है।


कंस्ट्रक्शन क्षेत्र छह माह बाद ही आ पाएगा अपनी लय में
पथ निर्माण विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर महेश चौधरी का कहना है कि कम से कम छह माह बाद ही कंस्ट्रक्शन क्षेत्र लय में आएगा। इस वजह से सभी प्रोजेक्ट छह माह से एक वर्ष देरी से पूरे होंगे। अधिकतर प्रोजेक्ट का कॉस्ट रिवाइज्ड होगा। इससे लागत भी बढ़ेगी। निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को लंबे समय तक इसका असर झेलना होगा।


ऐसे पड़ रहा असर

निगम भवन...मजदूर काम छोड़ लौट गए घर
कचहरी रोड स्थित कलेक्ट्रेट बिल्डिंग और आरआरडीए बिल्डिंग के बीच में नगर निगम का नया भवन बनकर तैयार है। आंतरिक सज्जा का काम चल रहा था, पर अब बंद है। अधिकतर मजदूर बंगाल और अन्य राज्यों के थे। वे अपने घर चले गए हैं। करीब 45 करोड़ रुपए की लागत से बिल्डिंग बन रही है। इसे मार्च में ही हैंडओवर करना था, पर अब बनने में कम से कम तीन माह लगेंगे।

रवीन्द्र भवन... 1 साल पीछे चला गया प्रोजेक्ट
सरकार के आदेश के बाद रविन्द्र भवन का काम बंद है। यहां के मजदूर घर लौट गए। 155 करोड़ की लागत से बन रहे रविन्द्र भवन को पिछले वर्ष नवंबर में ही हैंडओवर करना था। पर डिजायन बदलने से देरी से काम शुरू हुआ। जुडको के अफसरों की मानें तो इसी वर्ष काम पूरा कराने का प्रयास था, पर अब शायद अगले साल तैयार हो।

शहर में रोड, गांवों में पुल-पुलिया निर्माण... छह माह तक रुकेंगे
8 हजार करोड़ से अधिक की लागत से रोड, पुल-पुलिया का निर्माण शहर से गांव तक चल रहा था, जो पिछले तीन माह से बंद है। क्योंकि नई सरकार ने इसका पेमेंट रोक दिया था। जब सरकार ने पेमेंट करने से रोक हटाई तब कोरोना आ गया। ऐसे में काम ठप है। सरकारी खजाना भी खाली है। फिर कंस्ट्रक्शन क्षेत्र से जुड़े विभागों को पेमेंट रोकने को कहा गया है। यानी कोरोना संकट के बाद पैसे की वजह से छह माह तक सारे प्रोजेक्ट अटके रहेंगे।


वाटर सप्लाई स्कीम...मजदूर और मानसून दोनों रुलाएंगे
रांची को दो फेज में बांटकर वाटर सप्लाई स्कीम पर काम चल रहा है। करीब 500 करोड़ रुपए की लागत से चल रहे इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2021 तक पूरा करना है। लेकिन जानकारों की मानें तो छह माह की देरी होने से वर्ष 2021 में किसी भी हाल में यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं होगा। बाहर के मजदूरों के लौटने से मई तक काम शुरू होना मुश्किल है।

सिटी...अब 3 साल में होगा बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का ही काम
रांची स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 550 करोड़ रुपए की लागत से बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का काम चल रहा है। लेकिन लॉकडाउन से काम बंद हो गया। मानसून में भी काम बंद रहेगा। ऐसे में दो वर्ष में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट में कम से कम तीन वर्ष का समय लगेगा। झारखंड अर्बन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट का काम भी बंद हो गया है।

भास्कर के एक्सपर्ट
कोरोना संकट का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। कंस्ट्रक्शन बिजनेस से जुड़े निजी सेक्टर तो एक से दो माह में रिकवरी कर लेगी, लेकिन सरकारी प्रोजेक्ट में देरी होना तय है। क्योंकि लॉकडाउन की वजह से सरकार को काफी कम टैक्स मिलेगा। ऐसे में सभी प्रोजेक्ट के लिए पेमेंट करना संभव नहीं होगा। जिन ठेकेदारों को लॉकडाउन के बाद पेमेंट होगा उन्हें निर्माण सामग्री मंगाने में भी समय लगेगा। ऐसे में कम से कम दो माह स्थिति सामान्य होने में लगेंगे। उस समय भी नहीं कहा जा सकता कि निर्माण सामग्री की मांग और आपूर्ति कितनी होगी, क्योंकि इसका असर ही इसके दाम पर पड़ेगा। इसके बाद मानसून में कई कार्य बंद हो जाएंगे। इस वजह से अधिकतर प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं होंगे। -राजीव चड्‌डा, आर्किटेक्ट सह अर्बन डिजायन



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
रांची स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 550 करोड़ रुपए की लागत से बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का काम चल रहा है। लेकिन लॉकडाउन से काम बंद हो गया। मानसून में भी काम बंद रहेगा।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2wh7adn
via IFTTT

Comments