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सब्जियां भी अाैने-पाैने भाव में बेचनी पड़ रहीं


कोरोनावायरस के प्रसार के डर से खेती-किसानी का काम भी बाधित हाे रहा है। बलियापुर अाैर अासपास के इलाकाें में गेहूं की फसल खेताें में तैयार हाे गई है, लेकिन उनकी कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। एेसा नहीं है कि ये मजदूर कहीं दूर से अाते थे अाैर लाॅकडाउन की वजह से नहीं पहुंच पा रहे हैं। असल में मजदूर अासपास के ही हाेते हैं, लेकिन उनके मन में डर बैठा है कि वे काम पर जाएं अाैर कहीं काेराेना के संक्रमण की चपेट में न अा जाएं। एेसे में किसान खुद ही अपने परिवार के सदस्याें के साथ गेहूं की कटाई कर रहे हैं। कई जगहाें पर कुछ किसान मिलकर किसी एक किसान के खेत में गेहूं की कटाई में मदद कर रहे हैं। इसी तरह वे गेहूं की मड़ाई (दानाें काे अलग करना) में भी एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। बलियापुर क्षेत्र के पलानी, ढोकरा, महुलटांड़, गुलूडीह, डांगी, कल्याणडीह, जगदीश, कारीटांड़, दूधिया, बाघमारा, सैरियाभीठा, पहाड़पुर, दोलाबड़ आदि गांवाें में इसी तरह गेहूं की कटाई अाैर मेड़ाई का काम चल रहा है।

पहले बेमाैसम की बारिश, अब काेराेना का डर

बलियापुर क्षेत्र के किसान जलेश्वर महतो, सचिन महतो, वासुदेव महतो, कालेश्वर महतो, लक्ष्मी महतो, अनिल महतो, गोकुल महतो, सुलेमान अंसारी आदि कहते हैं कि पहले बेमाैसम की बारिश ने फसल काे नुकसान पहुंचाया। उससे जूझते हुए किसी तरह कम खेताें में ही सही, फसल तैयार हाे गई, ताे अब काेराेना के डर से कटाई अाैर मड़ाई में दिक्कतें अा रही हैं।

मुश्किल समय में किसान ही कर रहे एक-दूसरे की मदद

बलियापुर अाैर अासपास की बड़ी अाबादी खेती अाैर इससे जुड़े कामाें पर निर्भर है। इस इलाके में सब्जियाें की खेती भी बड़ी पैमाने पर की जाती है। सिंचाई के संसाधनाें का अभाव हाेने के बावजूद वे मेहतन अाैर लगन से खेती करते हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं अाैर पुरुष शहरी क्षेत्र के बाजाराें में राेजाना जाते हैं, हालांकि लाॅकडाउन में खरीदाराें के कम अाने से पूरी सब्जियां नहीं बिक पा रही हैं। साथ ही, दाेपहर में घर लाैट अाने की जल्दी में अाैने-पाने भाव में सब्जियां बेच देना पड़ता है।



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