एक तरफ दूसरे राज्यों में फंसे झारखंड के मजदूरों से केंद्र व राज्य सरकार लगातार अपील कर रही है कि वे लॉकडाउन का पालन करें। थोड़ी दिक्कत होगी, मगर जहां हैं वहीं रहें। दूसरी तरफ झारखंड के दो सांसद संजय सेठ व पीएन सिंह लॉकडाउन के बीच ही दिल्ली से झारखंड आ पहुंचे हैं। हालांकि दोनों सांसदों का कहना है कि वे दिल्ली में होम क्वारेंटाइन में थे और सड़क मार्ग से राज्य में आकर भी अभी होम क्वारेंटाइन में ही हैं। मगर उनके इस आचरण से कई सवाल खड़े हो गए हैं। पीएम मोदी बार-बार लॉकडाउन के सख्त पालन की बात कह रहे हैं। आम आदमी को किसी भी सूरत में राज्य की सीमा लांघने की अनुमति नहीं मिल रही है। ऐसे में दो सांसद ही इन नियमों को ताक पर रख रहे हैं।
रविवार को धनबाद पहुंचे थे पीएन सिंह
धनबाद सांसद पीएन सिंह रविवार को शहर पहुंचे थे। मंगलवार को बीडीओ व सीओ के अनुरोध पर उन्होंने होम क्वारेंटाइन में रहने का फैसला किया। वे बोले कि मैं कोई चोरी-छिपे थोड़ी आय हूं, दिल्ली डिप्टी पुलिस कमिश्नर ने पास जारी किया। चार राज्यों से गुजरा, 20-25 जगह पुलिस ने रोककर पूछताछ भी की। वे बोले-मैं यहां जनता से मिलने आया हूं। बुधवार को उनकी स्वास्थ्य जांच होगी।
सोमवार रात रांची पहुंचे संजय सेठ
रांची से सांसद संजय सेठ सोमवार रात करीब 11:30 बजे सड़क मार्ग से दिल्ली से रांची पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे दिल्ली कमिश्नर से परमिशन लेकर रांची आए हैं। सड़क मार्ग में उन्होंने गाड़ी रोकना तो दूर, कहीं रुककर चाय तक नहीं पी। उन्होंने कहा वे यहां जनता की मदद करने आए हैं। वे 10 थर्मल स्कैनर लाए थे जो उन्होंने डीसी को दिए हैं। अब वे 3 मई तक घर में ही रहेंगे, लाॅकडाउन का पालन करेंगे।
भास्कर सवाल-जनता की मदद तो दिल्ली में रहकर भी हो सकती थी, लॉकडाउन तोड़ना क्यों जरूरी था
राज्य के दोनों सांसद राजनीति में वरिष्ठता रखते हैं, जिम्मेदार हैं। अपने क्षेत्र की जनता के प्रति उनकी चिंता भी अच्छी बात है। मगर सवाल ये उठता है कि क्या वे दिल्ली में रहकर लॉकडाउन का पालन करते हुए भी जनता की मदद नहीं कर सकते थे। अपने क्षेत्र में सांसद निधि के इस्तेमाल की व्यवस्था वह दिल्ली से कर सकते थे। कार्यकर्ताओं से भी फोन के जरिये संपर्क कर सकते थे। फिर लाॅकडाउन में दिल्ली से झारखंड आना क्यों जरूरी था। भले ही वे समर्थ अधिकारियों की अनुमति लेकर आए हों, मगर उनका ये आचरण अच्छा उदाहरण नहीं पेश करता।
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