(आरिफ हुसैन अख्तर)वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण की लड़ाई में एक ओर डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्य कर्मी व सफाई कर्मी फ्रंट वारियर्स की भूमिका निभा रहे हैं, वहीं दूसरी कल तक सिर्फ अपराधियों के पीछे भागने वाले पुलिस पदाधिकारी व जवान भी इस लड़ाई में अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं। लॉकडाउन का नया स्वरूप आने के बाद भी वे अपने घर परिवार से दूर रहकर खुद की को जान जोखिम में डालकर हर मोर्चे पर प्रत्येक दिन अलग अलग भूमिका में नजर आते है। किसी भी सूचना पर शहर के चौक चौराहों से लेकर सुदूर गांवो तक पहुंच कर अपने कर्तव्यों को निभाना इनकी दिनचर्या बन गई है। धूप हो या बरसात इसके बावजूद लॉक डाउन व सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्ण तरीके से पालन कराने में हर जगह मुस्तैद नजर आते हैं। कोरोना वायरस का आगमन ने पुलिस की छवि व तस्वीर ही बदल डाली है। विधि व्यवस्था को बनाये रखने के साथ साथ संवेदनशील व अति संवेदनशील मामलों का भी आसानी से पटाक्षेप कर पुलिस ने अपनी कार्यशैली से हर तबके का दिल जीतने में कामयाब रही है। कोरोना संक्रमण से लड़ाई में पुलिस के पास पर्याप्त साधन भी नहीं है। इसके बावजूद वे सिर्फ मास्क पहन कर खुद की जान को जोखिम में डालकर लोगों की जिंदगी को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। उनके प्रयास से ही लोग परिवार के बीच सुरक्षित रहैं।
पहले समझाते हैं, फिर उठक -बैठक व मेंढक बना चेतावनी देकर छोड़ते हैं
जिले के नए एसपी ह्रदीप पी जनार्दनन पुलिस टीम का नेतृत्व करते हुए कोरोना वारियर्स के भूमिका में अहम रोल निभा रहे हैं। इस कार्य में जिले के प्रशिक्षु सब इंस्पेक्टरों का भी अहम रोल है। जिले की मुख्य सड़कों पर तैनात पीएसआई रवि शंकर कुमार, निर्मल कुमार महतो, पायल कुमारी, प्रदीप कुमार, अंजली टोप्पो आदि हर आने जाने वालों वालों पर पैनी निगाह रखते हैं। लॉकडाउन तोड़ने वालों के प्रति ये सभी नरमी बरतते हैं। उनकी यही नरमी लोगों के बीच असरदार भी साबित हो रहा है। लोगों के पकड़े जाने के बाद वे उन्हें उठक बैठक व मेंढक बनाकर सड़कों पर चलाकर चेतावनी देकर छोड़ देते हैं, जिसके कारण पुलिस को जनसहयोग भी मिल रहा है।
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