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Jharkhand daily news

(जीतेंद्र कुमार)मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि झारखंड राज्य का निर्माण संघर्ष का परिणाम है। कोरोना वायरस के संक्रमण के इस दौर में संसाधनों की कमी पर रोने के बदले हम आत्मबल से उबरेंगे। गरीब राज्य होने के बाद भी इस विषम परिस्थिति में अपनी तैयारी, खुद से संघर्ष व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए फिर जंग जीतेंगे व अपनी पहचान बनाएंगे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य से बाहर कमाने के लिए लोगों के जाने के पीछे मनरेगा की कम मजदूरी दर है। बढ़ाने के बाद भी झारखंड में मनरेगा के मजदूरी का दर 200 रुपए नहीं पहुंचा है। जबकि दूसरे राज्यों के लिए 300 से ऊपर तक है। वह इस मुद्दे को केंद्र के समझ गंभीरता से उठाएंगे। कोई भूखा नहीं रहेगा, सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास के बाद भी कोई कमी नहीं रह जाए, उसे दूर करने के लिए विधायकों को 15-15 लाख रुपए दिए जा रहे हैं।

राज्य कोरोना के संकट और इसके बाद खड़े होने वाले आर्थिक संकट दोनों से लड़ने की तैयारी कर रहा है। कोरोना महामारी से इस वैश्विक संकट के दौर में झारखंड के हालात और राज्य सरकार द्वारा इससे उबरने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर दैनिक भास्कर से बातचीत और मीडिया द्वारा कई स्तरों पर किए गए के सवालों के जवाब में हेमंत सोरेन ने ये बातें कही।

सवाल- आपने 100 दिन का कार्यकाल पूरा कर लिया, क्या कहेंगे...
सीएम-झारखंड एक पिछड़ा राज्य है। यह कई राज्यों से घिरा है। फिर भी कोरोना के संक्रमित मरीजों की संख्या कम है। शायद यह बेहतर प्रबंधन का ही नतीजा है।

सवाल- संसाधन नहीं है, पीपीई किट, टेस्टिंग किट, पर्याप्त थर्मल स्कैनर नहीं हैं । ऐसे में लोग डर रहे हैं कि कहीं अंदर ही अंदर संक्रमण तो नहीं फैल रहा। केंद्र की मदद मिल रही है क्या?
सीएम- यह विपरीत घड़ी है। हमें इस समय अंतरराज्यीय सामंजस्य काफी अच्छा दिखा है। इसमें मजबूती आयी है। जो जहां है, वहां की सरकार मदद कर रही है। सभी राज्य संसाधन को लेकर चिंतित हैं। केंद्र से गुहार लगा रहे हैं। पीएम की वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्रियों के साथ बात हुई है। उसमें झारखंड को बोलने का मौका नहीं मिला। लेकिन इससे सोच और कमी पर कोई असर नहीं पड़ता।। मांगे रखी, उस अनुरूप चीजें नहीं आई, लेकिन यह भी सही है कि स्टॉक में हो तब तो मिलगा। उम्मीद करते हैं कि आगे मिलेगा। हमने केंद्र सरकार से 300 थर्मल स्कैनर मांगा, मिला 100 ही। 72000 पीपीई किट के विरुद्ध 5000 किट ही मिला। 300 वेंटिलेटर मांगा था, एक भी नहीं मिला। लेकिन डरने और चिंतित होने की कोई जरूरत नहीं। सरकार अपने सीमित संसाधन और मजबूत इच्छा शक्ति के बल पर इस जंग को जीतेगी।


सवाल-टेस्ट बहुत कम हो रहे हैं। इससे भी लोग चिंतित हैं। बड़े राज्यों में संक्रमण का चेन डाउन होने लगा है। हमारे यहां ऐसा नहीं है, क्योंकि टेस्ट ही कम हो रहा है।
सीएम-धीरे-धीरे टेस्ट में गति आ रही है। यह सही है कि संसाधनों का अभाव है। पूरे देश में इसकी कमी है। जहां प्राइवेट अस्पतालों के पास संसाधन हैं, वहां अस्पताल ही बंद हो रहे हैं। स्थिति विपरीत है। इसलिए हम एहतियात के साथ हर कदम आगे बढ़ा रहे हैं। टेस्टिंग में कैसे गति आए, इसका भी रास्ता ढूंढ रहे हैं। फिर भी झारखंड के लोगों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इस महामारी का एक मात्र इलाज सोशल डिस्टेंसिंग है। इसको बनाए रख कर ही हम कोरोना से जंग जीतेंगे।


सवाल- लॉक डाउन से राज्य की अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान होगा? विकास कितना प्रभावित होगा? इससे कैसे निबटेंगे?
सीएम-लॉक डाउन से अर्थव्यवस्था व विकास बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कोई भी इसका अंदाजा लगा सकता है। लेकिन कितना होगा, इसका आकलन अभी करना मुश्किल होगा। झारखंड से लगभग 12-14 लाख लोग बाहर कमाने जाते हैं। इनके तो रोजगार समाप्त हो ही चुके हैं, झारखंड में रहनेवाले मजदूर भी बेरोजगार हो चुके हैं। कोरोना महामारी के थमने के बाद सरकार को कई तरह की समस्या से सामना करना पड़ेगा। लॉक डाउन हटने के बाद कई मुसीबतें आएंगी, इसका हमें आभास है। बेरोजगारी, बाहर से आनेवाले लोगों को मेडिकल सिस्टम में रखना और आर्थिक संकट। लेकिन सरकार अभी से इसकी तैयारी कर रही है। सरकार इन चुनौतियों से निबटने की दिशा में ध्यान दे रही है।

सवाल- लॉक डाउन हटाने का प्लान क्या है। किस तरह लॉक डाउन हटाएंगे और कब तक? एक साथ या फेज वाइज। पीएम ने भी सर्वदलीय बैठक में संकेत दिया है।
सीएम- यह आपदा है। आपदा कभी भी कोई भी रूप ले सकती है। हो सकता है कि यह विकराल रूप धारण कर ले। स्लो डाउन हो जाए। यह झारखंड के नजरिए से बात कर रहे हैं। इसलिए इस विषय पर पहले कुछ नहीं कहा जा सकता। क्योंकि इसका बाहर फंसे मजदूरों पर, क्वारेंटाइन व आइसोलेशन में रह रहे लोगों पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है। इसलिए समय के अनुरूप निर्णय लेंगे।



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सीएम सोरेन बोले- झारखंड राज्यों से घिरा है। फिर भी कोरोना के संक्रमित मरीजों की संख्या कम है। शायद यह बेहतर प्रबंधन का ही नतीजा है।


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