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Jharkhand daily news

(संतोष चौधरी) मकान यहां बना रहे हो, सजावट यहां कर रहे हो, संग्रह यहां कर रहे हो, पर खुद मौत की तरफ भागे चले जा रहे हो। जहां जाना अटल है, पहले उसको ठीक करो... कभी हरमू मुक्तिधाम की दीवारों पर लिखे यह वाक्य सच्चाई से रू ब रू कराते थे। इसके बावजूद जिम्मेदारों ने इस वाक्य की गहराई को कभी समझा नहीं। इसका नतीजा है कि 11 वर्ष पहले करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से बने हरमू विद्युत शवदाहगृह को आज तक चालू नहीं हुअा। आरआरडीए ने करीब 2 करोड़ खर्च करके शवदाह गृह का निर्माण कराया था। इसके बाद नगर निगम को सौंप दिया। ओल्ड मॉडल की मशीन होने से बिना चालू किए ही विद्युत शवदाह गृह में शव जलाने के लिए लगाया गया हिटर कंडम हो गया। नगर निगम ने इसे दुरूस्त कराने की भी जहमत नहीं उठाई।

 दो माह पहले ही कोरोना संकट से निपटने के लिए हुई अधिकारियों की बैठक में रांची डीसी ने संक्रमित बॉडी को जलाने के लिए नगर निगम को विद्युत शवदाह गृह को तैयार करने को कहा था। लेकिन निगम ने कहा कि इतनी जल्दी दुरूस्त नहीं किया जा सकता है। अब रविवार को बरियातू और रातू रोड कब्रिस्तान में कोरोना पॉजिटिव डेड बॉडी को दफनाने का स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया। गलती से कोरोना का विस्तार होने से मौत का आंकड़ा बढ़ता है तो बॉडी को जलाना और दफनाना दोनों मुश्किल हो जाएगा।
निगम ने समिति को सौंपा पर अतिक्रमण नहीं हटाया

हरमू मुक्तिधाम के सामने स्थित विद्युत शवदाह गृह के संचालन की जिम्मेवारी में निगम फेल हो चुका है। इसलिए, निगम ने मारवाड़ी सहायक समिति को संचालन की जिम्मेवारी सौंप दी है। समिति इसके लिए तैयार हो गई, लेकिन तीन माह पहले ही समिति ने निगम को पत्र लिखकर शवदाह गृह में किए गए अतिक्रमण हटाने और चारों ओर टूटे बाउंड्रीवॉल की मरम्मत कराने का आग्रह किया था, ताकि नई मशीन लगाकर इसे शुरू किया जा सके। लेकिन, निगम ने आज तक शवदाह गृह को अतिक्रमणमुक्त नहीं कराया। यहां खटाल वालों ने कब्जा कर लिया है। गन्ना का रस बेचने वालों ने अपना आशियाना बना लिया है। शाम ढलते ही असमाजिक तत्वों का अड्डा लगता है। इसे जल्द चालू कर दिया जाए तो कोरोना से होने वाली मौत के बाद दाह संस्कार में दिक्कत नहीं होगी।



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If the crisis comes, the administration is busy in reviving the dead electric crematorium for 11 years.


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