कोरोना संकट और लॉकडाउन से उत्पन्न स्थिति ने हर किसी की परेशान कर दिया है। इससे व्यापार जगत, कार्यालय, शिक्षण कार्य, खेती-मजदूरी और विकास कार्य पूरी तरह ठप है। ऐसे में सभी की नजरें इस संकट के टलने और स्थिति के सामान्य होने पर हैं। इसके बाद भी चुनौतियां कम नहीं हैं। कृषि मंत्री बादल पत्रलेख का कहना है कि हम विश्वव्यापी कोरोना महामारी से उत्पन्न संकट से उबरने की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। विभागीय पदाधिकारियों से इस मुद्दे पर अपडेट होने के साथ ही मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श चल रहा है। राज्य के हालात पर नजर है। पिछले-तीन चार दिनों में कोरोना के अप्रत्याशित फैलाव से बचाव के उपाय पर काम हो रहा है। विभागीय स्तर पर देखें तो जितने दूध की खपत नहीं हो रही थी, उसका पाउडर बनाने, सब्जी के अलावा मांस-मछली की बिक्री को प्रतिबंध से मुक्त करने का आदेश दिया गया है। पशुचारा की उपलब्धता की दिशा में कदम उठाए गए हैं। लेकिन अब इससे भी महत्वपूर्ण पक्ष है कि कोरोना संकट के थमने के बाद उत्पन्न होनेवाली परिस्थिति से कैसे निपटेंगे। अानेवाली विश्वव्यापी मंदी से कैसे संभलेंगे।
राज्य सरकार किसानों और मजदूरों की मदद के मुद्दे पर बढ़ा रही कदम
कृषि मंत्री ने कहा कि कोरोना से सबसे अधिक मार किसानों और मजदूरों पर पड़ेगी। इस दृष्टि से इस सेक्टर को संभालने पर विशेष ध्यान देना है। कोरोना से पहले ओलावृष्टि जैसी अापदा से किसानों को भारी नुकसान हुअा है। बिहार ने अपने यहां सामान्य कृषि भूमि के लिए 6800 और पूर्ण सिंचित भूमि के लिए 13500 रुपए प्रति हेक्टेयर मुअावजे की घोषणा की है। मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में तीन हजार रुपए प्रति हेक्टेयर दिए जाने की बात उठी। इस पर मंत्री-मंत्री के बीच मतांतर भी हुअा। सरकार बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व केरल के फैसलों का अध्ययन कर रही है। इन विषयों पर अगली कैबिनेट में फैसला लिया जाएगा।
दूसरे राज्यों से झारखंड लौटे मजदूरों को भी देना होगा रोजगार का साधन
बादल ने कहा कि लॉकडाउन के बाद वही दृश्य सामने अाएगा जिस तरह अाजादी के बाद लोग भर-भर कर बस और ट्रेनों से अपने गृह राज्य लौटे थे। बाहर से अपने प्रदेश लौटे मजदूर फिर जल्द दूसरे राज्यों में कमाने नहीं जाएंगे। उस स्थिति में उन्हें रोजगार के साधन उपलब्ध कराना होगा। कृषि मंत्री के अनुसार विशेषाधिकार के तहत सरकारें किसी भी दूसरे सरकार, कंपनी या बैंक के साथ समझौते को रद्द कर सकती है। जनता के हित में स्वविवेक से निर्णय ले सकती है। चीन ने शेयर मार्केट को बचाने के लिए शेयर खरीदना शुरू कर दिया है। इसलिए हमें चीन, साउथ कोरिया जैसे विकसित देशों को फॉलो करना पड़ेगा।
कैबिनेट की बैठक में किसानों को राहत देने के मुद्दे पर हो सकते हैं महत्वपूर्ण फैसले
केंद्र को अलग-अलग राज्यों की जरूरत के अनुरूप लेना होगा निर्णय : बादल ने कहा कि झारखंड और हरियाणा का जीडीपी तथा प्रति व्यक्ति अाय अलग-अलग है। जीएसटी के लागू होने के बाद बिहार जैसे सर्विस सेक्टर वाले राज्य को लाभ और मिनरल बेस्ड व उत्पादक राज्यों में शुमार झारखंड को नुकसान हुअा है। इस स्थिति में केंद्र सरकार को भी राज्यों की माली हालात के मद्देनजर विशेष पैकेज की घोषणा करनी होगी। एक ही रणनीति सभी राज्य के लिए सही नहीं होगी।
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