लाॅकडाउन के दौरान पुलिस अफसर और जवान जान हथेली में रखकर इस बीमारी से लोगों को बचाने में जुटे हंै। परिवार के लोग भी सुरक्षित रहें इसके लिए ड्यूटी से घर पहुंचते ही पहले कपड़े उतारकर धोते हैं। फिर नहा कर खुद को संक्रमण रहित कर भीतर घुसते हैं और परिवार से दूरियां बनाकर रह रहे हैं। यह उनकी दिनचर्या हो गई है। चाहे वे रात के दो बजे ही क्यों न घर जा रहे हों। दोपहर के कभी राशन, दूध व अन्य सामान पहुंचाना होता है तो बाहर से ही लौट आते हैं। सबसे अधिक खतरा डॉक्टरों के बाद पुलिस को है। दोनों को चौबीसों घंटे लोगों के बीच में रहता होता है। ऐ बचने के लिए तरह-तरह के उपाय करते हैं। दिनभर अपने बच्चों से नहीं मिल पाते।
घर में बच्चों के करीब नहीं जाता: जय प्रकाश गुप्ता
मैं जब भी घर आता हूं। बाहर वर्दी उतारकर बाहर वाले कमरे पर वर्दी को रखकर पहले गरम पानी में डिटॉल डालकर नहाता हूं। नहाने के बाद प|ी दूर से अलग कपड़े देती है उसे पहनकर अंदर घुसता हूं। घर को सुरक्षित रखने के लिए घर के लगे ग्रिल व कुंडी व लोहे की चीजों को दिन में तीन बार सेनेटाइज करते हैं। बच्चों को दूर रखता हूं। उन्हें कहता हूं कुछ दिन और हैं फिर सब कुछ ठीक हो जाएगा। मैं दिनभर अपने बच्चों को बहुत मिस करता हूं। घर जाता हूं तो उन्हें गोदी से उठाने की इच्छा होती है पर मन गवाही नहीं देता।
बेटा पास आना चाहता है पर मैं अनदेखी कर रहा हूं: सनिप रात्रे
घर पहु़ंचने से पहले अपनी प|ी को फोन कर जानकारी देता हूं। घर के बाहर खुद को संक्रमण रहित करने का पूरा सामान होता है। बाहर ही नहा धोकर पुराने कपड़े उसमें भिंगा देता हूं फिर धुले कपड़े पहनकर भीतर जाता हूं। इस बीच मेरे घर वाले मुझसे दूर रहते हैं। बच्चों के लिए जो भी खाने पीने की चीज लेकर आता हूं उन्हें भी घर के बाहर पहले झागयुक्त पानी से फिर साफ पानी से धोकर ही देता हूं। पिछले 10 दिनों से अपनी बच्चे को गोद में नहीं लिया। वह मेरे पास आना चाहता है पर मैं अनदेखी कर दूसरी ओर चला जाता हूं।
परिवार से दूर अकेले कमरे में रहता हूं: परिवेश तिवारी
मैं पीछे के गेट पर जाता हूं। बच्चे वहीं पर सेनेटाइजर लाकर देते हैं। उसे लगाकर बाहर लगे नल से पहले अपना हाथ साफ करता हूं फिर वर्दी उतारकर अलग जगह पर रखकर पीछे ही नहाने चला जाता हूं। मेरे घर के पीछे एक अलग कमरा है। वहां घर में पहने के कपड़े मेरी प|ी पहले से रख देती है। अंदर जाने के बाद कपड़े पहनता हूं फिर खाना खाना हूं। प|ी या बच्चे दूर से ही खाना परोसकर चले जाते हैं। मैं कभी बच्चों के रूम में नहीं जाता। पहले सभी एक साथ खाना खाते थे। प|ी व दोनों बच्चे अलग खाना खाते हैं। रात में अकेले ही सोता हूं। ड्राइंग रूम में मेरा आशियाना है। सोफे में ही रात गुजर जाती है।
परवाह अपनों की
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2UUYOlr
via
Comments
Post a Comment