लॉकडाउन में गरीब परिवारों को मुफ्त और सामान्य परिवारों को 10 रुपए प्रति किलो के हिसाब से दो महीने का चावल एक साथ दिया जा रहा है। कुछ दिनों पहले सरकारी राशन में पैसे वापस नहीं करने पर जिला प्रशासन ने 3 राशन दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की थी। लेकन अब तो इल्ली और कीड़े लगे चावल बांटने का मामला सामने आया है। जिम्मेदारों ने जिले की 25 पंचायतों में कीड़े और इल्ली लगे चावल की सप्लाई कर दी है।
जब राशन दुकानों से ये चावल लोगों को दिया जाने लगा तो ग्रामीणों ने लेने से इंकार कर दिया और अफसरों से इसकी शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य विभाग के अफसरों ने मौके पर पहुंच कर जांच की और करीब 3 ट्रक चावल(करीब 600 बोरा) वापस करवाकर वहां अच्छा चावल लेकर आए और बंटवाना शुरू किया है। कई और पीडीएस दुकानों में भी कीड़े लगे चावल सप्लाई होने की शिकायत आई है। इनमें से ज्यादातर ने राशन बांट दिया है।
तीन विभाग मिलकर देते हैं सप्लाई का प्रमाण पत्र
पीडीएस की दुकानों से दिया जाने वाला चावल लोगों के खाने लायक है या नहीं, इसका प्रमाण पत्र तीन विभाग के कर्मचारी मिलकर देते हैं। इसमें वेयर हाउस के प्रबंधक, संग्रहण केंद्र प्रभारी और क्वालिटी इंस्पेक्टर शामिल हैं। ये तीनों चावल की गुणवत्ता की जांच कर इसकी रिपोर्ट नान को देते हैं जिसके बाद नान इस चावल को पीडीएस की दुकान में भेजता है। वेयर हाउस के कुछ कर्मचारियों ने बताया कि चावल के सही ढंग से भंडारण की जिम्मेदारी वेयर हाउस के साथ नान की भी है महीनों पहले मिलर्स द्वारा जमा किए गए चावल की क्वालिटी की जांच किए बगैर ही सीधे राशन दुकान में भेज दिया गया है। अब अपनी जवाबदेही से बचने इसे वापस मंगा रहे हैं। खराब हो चुके और कीड़े लगे इस चावल का उपयोग कैसे किया जाएगा, इसका कोई जवाब अफसरों के पास नहीं है।
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