कोरोनावायरस से निपटने के लिए प्रत्येक जिले में कोविड-19 हॉस्पिटल संचालित करने के निर्देश दिए गए थे। रायगढ़ में 100 बेड का कोविड-19 हॉस्पिटल खुलना था जिसे मातृ शिशु अस्पताल में शुरू किया जा रहा है। यहीं पर कोरोना संक्रमित और संदेही मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है। एक माह बीत चुका है, लापरवाही इस चरम सीमा पर है कि पूरी तरह से क्रिटिकल केयर यूनिट, सेंट्रल ऑक्सीजन लाइन, डायलिसिस के लिए आरओ प्लांट, बायोमेडिकल निस्तारण, डॉक्टरों की जांच और सुरक्षा के लिए इंफ्रारेड थर्मामीटर, पीपीई किट का बंदोबस्त नहीं हो सका।
रविवार को डब्ल्यूएचओ की ओर से आए प्रतिनिधि को भी डॉक्टरों ने इन सुविधाओं का अभाव होना बताया। इस वैश्विक महामारी से निपटने में इतनी बड़ी चूक और अधूरी व्यवस्थाएं देख टीम के सदस्य ने रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने की बात कही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपनी तैयारी पूरी होने के साथ हर स्थिति में मुस्तैद होने का दम भर रहे हैं। गनीमत तो यह है कि जिले में अभी तक स्थिति सामान्य है और एक भी मरीज संक्रमित नहीं मिला है। स्थिति गंभीर हुई तो अधूरी व्यवस्थाओं के साथ लड़ रहे स्वास्थ्य विभाग स्थिति संभाल नहीं सकेगा।
लक्षण ना छिपाएं, प्रत्येक संदिग्ध की जांच की जाएगी
प्रदेश सरकार ने सभी जिलों को आदेश जारी किया है कि अब सर्दी, खांसी, बुखार के साथ किसी भी तरह की संदिग्ध मौत होने पर कोरोना का सैंपल लिया जाएगा। सीएमएचओ डॉ. एसएन केशरी ने बताया कि लोग बीमारी को कतई न छिपाए, बुखार, खांसी होने पर निकट के अस्पताल के साथ स्वास्थ्य विभाग की हेल्पलाइन व उन्हें फोन करके जानकारी दें। सीएमएचओ ने बताया कि शासन से निर्देश मिले हैं कि अब प्रत्येक संदिग्ध की जांच करनी होगी, इसके लिए 60 सैंपल प्रतिदिन जांच के लिए रायपुर भेजे जाएंगे। मरीजों ज्यादा हुए तो भी सभी के सैंपल भेजे जाने हैं।
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