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जंगल के रास्ते एमपी से पहुंची दस लाख की शराब चार थानों की टीम ने 48 घंटे में 7 लोगों को पकड़ा

लॉकडाउन के बीच शराब तस्करी और कोचियों के बड़े गिरोह को पुलिस ने पकड़ा है। चार थानों की टीम ने 48 घंटे लगातार ऑपरेशन चलाकर 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 10 लाख रुपए से अधिक की शराब बरामद की गई है। शराब को एमपी से जंगल के रास्ते खैरागढ़ थाना क्षेत्र के सिरसाही गातापार लाकर एक निजी मकान में डंप रखा गया था, तस्करी का मास्टर माइंड अब तक फरार है, जिस पर पुलिस ने पांच हजार रुपए का इनाम घोषित किया है।
एसपी जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि उन्हें शराब की बड़ी खेप जिले में पहुंचने की खबर मिली थी। अभियान के पहले दिन कलेवा और गातापार इलाके से करीब 38 पेटी शराब जब्त की गई। जब्त की गई शराब एमपी से में बिक्री के लिए बनी थी। कलेवा में पकड़े गए आरोपी भूपेश कोसरे से पूछताछ शुरू की गई। जिसने शराब की खेप पहुंचाने वाले मोहारा के मनीष सोनी की जानकारी दी। इसके बाद मनीष को पकड़कर पूछताछ शुरू हुई। मनीष ने डोंगरगढ़ के ईश्वर साहू, कलेवा के भीषम वर्मा, रेंगाकठेरा के हरीश साहू, प्रकाश यादव और पूरन वर्मा को सप्लाई देने की बात कही। पुलिस ने अलग-अलग ठिकानों से आरोपियों को गिरफ्तार किया।

कोचियों को शराब मनीष राजपूत ने सप्लाई की
कोचियों को शराब उपलब्ध कराने वाले मनीष सोनी ने पुलिस को बताया है कि उन्हें ये पूरी खेप मनीष राजपूत ने उपलब्ध कराई है। मनीष राजपूत गातापार का रहने वाला है। इसने एमपी से शराब लाकर प्रमोद सिंह नामक अन्य व्यक्ति के किराए के मकान पर डंप किया था। लेकिन दो दिनों तक चले धरपकड़ में पुलिस को मनीष राजपूत का सुराग नहीं मिला। इसके बाद एसपी शुक्ला ने मनीष राजपूत पर 5 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है।

जगह-जगह नाकेबंदी फिर शराब कैसे पहुंची
पूरे मामले में अब भी बड़ा सवाल शराब के गातापार तक पहुंचने पर बना हुआ है। लॉकडाउन में वाहनों की आवाजाही राेकने के लिए जगह-जगह नाकेबंदी गई है, इसके अलावा पेट्रोलिंग टीम भी गश्त कर रही है। हर थाना क्षेत्र के रास्तों में कड़ी नाकेबंदी का दावा किया गया है। ये नाकेबंदी लॉकडाउन के दौरान किसी भी तरह की आवाजाही को रोकने को की गई है। फिर भी आरोपी 300 पेटी शराब को गातापार के मकान में डंप करने में सफल हो गए।

राजनैतिक संरक्षण की भी पुष्टी, जांच की जाएगी
पूरे मामले में राजनैतिक संरक्षण की भी पुष्टि हुई है। प्रेसवार्ता के दौरान एसपी शुक्ला ने बताया कि इस एंगल से भी जांच हो रही है। लेकिन इन आरोपियों को किससे बड़ी मदद मिल रही थी, इसका खुलासा मास्टर माइंड मनीष राजपूत के पकड़े जाने के बाद ही होगा। सूत्रों के मुताबिक पूरे इलाके में शराब की अवैध बिक्री का खेल लंबे समय से जारी था, लॉकडाउन के अधिक मुनाफा कमाने के लिए ये खेप मंगाई थी, इसमें स्थानीय नेता भी जुड़े हैं।

जंगल के रास्तों का भी इस्तेमाल कर रहे तस्कर
भास्कर ने शराब तस्करी काे लेकर रविवार को प्रकाशित की खबर में बताया कि शराब नाकेबंदी के बीच भी जंगल के रास्तों से बार्डर पार कर रहे हैं। एसपी जितेंद्र शुक्ला ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने प्रेसवार्ता में बताया कि तस्कर इन दिनों जंगल के उन छिपे हुए रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां पुलिस की मौजूदगी नहीं रहती। इन्ही रास्तों से बार्डर क्रॉस किया जा रहा है। इसके लिए तस्कर देर रात का समय चुन रहे हैं। अब इन रास्तों पर भी निगरानी बढ़ाने का दावा एसपी ने किया है।
इन थानों के अफसर व जवानों की रही भूमिका
पूरे मामले के खुलासे में खैरागढ़, डोंगरगढ़, घुमका, मोहारा और चिखली चौकी की टीम की अहम भूमिका रही। शुक्रवार और शनिवार को इनकी विशेष टीम बनाई गई। जो इनपुट के आधार पर लगातार छापेमारी करते रहे। 48 घंटे तक टीम के सदस्य जुटे रहे। अफसर से लेकर आरक्षक तक सभी छिपाई गई शराब से लेकर फरार हाे रहे आरोपियों को दबोचने में लगे रहे।



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A team of four lakhs of liquor arrived from the MP through the jungle, the team of four police stations arrested 7 people in 48 hours


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