कोरोना वायरस से निपटने के लिए भिलाई को छोड़ रिसाली और दुर्ग निगम ने लोगों के लिए हैंड सैनिटाइजर और मास्क नहीं खरीदा है। पार्षद निधि की राशि से खरीदी होनी थी लेकिन दुर्ग में पार्षदों ने सहमति नहीं दी और रिसाली के पास पैसा नहीं है। इसीलिए दोनों निगमों ने हैंड सैनिटाइजर का वितरण नहीं किया।
6.25 लाख की आबादी वाले भिलाई में 15900 लीटर हैंड सैनिटाइजर का वितरण किया गया है। जबकि सवा लाख की आबादी वाले रिसाली में एक लीटर हैंड सैनिटाइजर और एक मास्क तक नहीं है। जबकि दुर्ग निगम ने अपने अधिकारी-कर्मचारियों व कुछ पार्षदों को देने के लिए ही हैंड सैनिटाइजर की खरीदी की। वो भी 800 लीटर, जिसका वितरण कर चुका है।
रिसाली नगर निगम हाल ही में अस्तित्व में आया है। आयुक्त ने सैनिटाइजर और मास्क लेने के लिए भिलाई निगम से मदद मांगी थी। लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली है। शासन ने अपनी तरफ से कोई फंड अभी जारी नहीं किया है। हालांकि वहां बीएसपी की मदद से गली मोहल्लों को सैनिटाइज कर रहे हैं।
भिलाई निगम- मास्क और सैनिटाइजर खरीदी के लिए पार्षदों ने दी निधि
कोरोना का खतरा बढ़ते देख भिलाई निगम के पार्षदों ने सबसे पहले अपनी निधि से राशि खर्च करने की योजना बनाई। उन्होंने हैंड सैनिटाइजेशन और मास्क खरीदने के लिए आयुक्त को अपना फंड दिया। निगम के अधिकारियों की माने तो सभी पार्षदों ने 50 हजार रुपए से लेकर 4 लाख रुपए की निधि इस कार्य के लिए दी। इसके बदले में निगम ने तकरीबन 1.75 लाख नग मास्क की खरीदी की और 15900 लीटर हैंड सैनिटाइजर की खरीदी की गई। पहले चरण का वितरण भिलाई में हो चुका है। कई वार्डों में इसकी डिमांड बढ़ी है।
दुर्ग निगम- दुर्ग के कुछ वार्डों में पार्षदों ने अपने स्तर पर वितरण किया
दुर्ग निगम ने अपने सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को करीब 8 हजार हैंड सैनिटाइजर की बोतल दिया है। उन्हें 15, 50, 100 व 200 एमएल की बोतल दी गई। पार्षदों व अन्य जनप्रतिनिधियों को भी उनके द्वारा सैनिटाइजर बांटे गए। आम पब्लिक को सैनिटाइजर का वितरण नहीं किया गया। अब तक शहर के 60 वार्डों में करीब 2 हजार लीटर सोडियम हाइबो क्लोराइड का छिड़काव किया है। 5 हजार लीटर की डिमांड भेजी गई है। कसारीडीह वार्ड-43 से पार्षद दीपक साहू ने घर-घर जाकर करीब 1500 सैनिटाइजर की बोतलें बांटी।
रिसाली निगम- निगम बनते ही पार्षदों का कार्यकाल हो गया शून्य
कोरोना वायरस से निपटने के लिए नवगठित रिसाली निगम के पास संसाधन नहीं है। रिसाली निगम के पास सैनिटाइजर और मास्क खरीदने भी पैसे नहीं है। इसके लिए न तो राज्य सरकार ने फंड दिया और न ही नगर निगम भिलाई ने कोई मदद की। इसकी वजह से सवा लाख की आबादी वाले रिसाली निगम क्षेत्र के एक भी घर में मास्क और सैनिटाइजर का वितरण नहीं किया गया। निगम के अधिकारी सिर्फ समाजसेवी संगठनों द्वारा दिए गए राशन को बांटने का काम कर रहे हैं।
भिलाई में भी कई वार्डों में वितरण नहीं
भिलाई के कई वार्डों में सैनिटाइजर नहीं बांटने की शिकायत मिली है। भाजपाई पार्षदों का कहना है कि जिन्हें बांटने का जिम्मा दिया है, वे भेदभाव कर रहे हैं। कई वार्डों में निगम अधिकारियों की उपस्थित में सैनिटाइजर बंटवाया जा रहा है। कुछ यही शिकायत मास्क वितरण को लेकर भी है। वहीं कुछ पार्षदों ने जोन लेवल से की गई खरीदी पर सवाल उठाए हैं।
3.35 लाख लीटर सैनिटाइजर निर्माण
प्रदेश की 7 डिस्टिलरीज और 13 जिलों में 41 महिला स्व सहायता समूह की सहायता से सैनिटाइजर का निर्माण किया जा रहा है। छग में 3 लाख 35 हजार 405 लीटर सैनिटाइजर का निर्माण हो चुका है। इनमें से 2 लाख 34 हजार 96 लीटर सैनिटाइजर वितरण हो चुका है। 96700 लीटर सैनिटाइजर का निर्माण जिले में किया गया है। दुर्ग जिले के लिए कुम्हारी से सैनिटाइजर बन रहा।
रिसाली निगम क्षेत्र में ये हालात क्यों बने, ये तीन प्रमुख वजह है...
- पार्षदों की निधि नहीं: भिलाई से अलग कर जब रिसाली निगम का गठन हुआ तो यहां के 13 पार्षदों का कार्यकाल खत्म शून्य कर दिया गया। इसलिए यहां के 13 पार्षद निवृत्तमान की भूमिका में रहने लगे। जबकि उनकी निधि में राशि थी। मगर कार्यकाल शून्य होने की वजह से इसका उपयोग नहीं कर सकेंगे।
- अधिकारियों में समन्वय: रिसाली और भिलाई निगम के अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी अभी से देखने को मिल रही है। भिलाई निगम के अफसर रिसाली को एक अलग ही नजरिए से देख रहे हैं। कई ऐसे मौके आए जब रिसाली को मदद की जरूरत हुई लेकिन भिलाई ने दूरी बनाने की कोशिश की।
- ठीक से संचालन नहीं: कायदे से रिसाली निगम का संचालन 1 अप्रैल से हो जाना था। मगर कोविड-19 वायरस के चक्कर में सब औपचारिकताएं धरी की धरी रह गई। अब जैसे-तैसे करके रिसाली निगम का संचालन किया जा रहा है। सरकार ने कुछ फंड रिसाली को दिया है मगर उससे काम नहीं होने वाला।
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