Skip to main content

सैकड़ों मकान और हजारों फ्लैट तैयार लेकिन खरीदार नहीं, 400 करोड़ का कारोबार प्रभावित

रियल एस्टेट काराेबार काे लॉकडाउन ने तगड़ा झटका दिया है। राजधानी में छाेटे-बड़े 600 से ज्यादा मकान बनकर तैयार हैं, लेकिन पिछले एक महीने में किसी ने कीमत तक नहीं पूछी। बिल्डरों का दावा है बाजार बंद होने से केवल एक महीने में 400 करोड़ से ज्यादा की खरीदी-बिक्री प्रभावित हुई है। मकानों में फंसे पैसों ने बिल्डरों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। लॉकडाउन खुलने के बाद रियल एस्टेट का बाजार की स्थिति को लेकर कोई दावा नहीं किया जा रहा है। इस वजह से बिल्डरों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
कोरोना के पहले लॉकडाउन से ही रियल एस्टेट की सारी गतिविधियां ठप है। बिल्डरों के दफ्तर और कंस्ट्रक्शन का काम बंद है। लॉकडाउन के इस दूसरे चरण में बाजार को राहत दिए जाने के बाद मटेरियल सप्लाई की चेन खुलती भी है तो मजदूरों की कमी के कारण काम शुरू नहीं हो पाएगा। हालांकि अभी काम बंद होने के बावजूद सभी तरह के खर्चे बरकरार हैं। बिल्डरों को स्टाफ की सैलरी, जीएसटी, बिजली और फोन बिल समेत कई तरह के खर्चे देने पड़ रहे हैं। प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए जो लोन लिया है उसकी किश्त, ब्याज और प्रिसिंपल कॉस्ट की वजह से बिल्डरों का अनुमान है कि मकानों की कीमत बढ़ती जा रही है। मकान महंगे होने की वजह से खरीदी-बिक्री प्रभावित होगी। इसका असर अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने पर पड़ेगा। तय समय में प्रोजेक्ट पूरे नहीं होने से कीमतें और बढ़ेंगी।
शॉपिंग मॉल मेंटेन करनाहो रहा मुश्किल
राजधानी के सभी छोेटे-बड़े शॉपिंग मॉल अलगे एक महीने तक बंद रहेंगे। इस वजह से वहां के 80 फीसदी से ज्यादा दुकानदारों ने साफ कर दिया है कि किराया नहीं देंगे और जब देंगे तो अपनी सुविधानुसार ही देंगे। किरायेदारों की इस मांग ने बिल्डरों की मुसीबतों को और बढ़ा दिया है। लॉकडाउन खुलने के बाद भी मॉल खुलेंगे या नहीं यह तय नहीं है। इस वजह से शॉपिंग मॉल संचालकों को अधिकतर खर्चों का इंतजाम खुद करना होगा। इसका असर कारोबार पर पड़ेगा।
बिल्डरों ने सरकार के समक्ष रखी ये मांगें

  • अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम में राज्य सरकार रजिस्ट्री पूरी तरह से माफ करे। यानी पंजीयन निशुल्क किया जाए।
  • नई स्कीम लानी चाहिए, जिसमें जमीन सरकार की और निर्माण बिल्डरों का। पीपीपी मोड पर काम होना चाहिए।
  • ईडब्लूएस के लिए 15 फीसदी जमीन छोड़ने का नियम अभी खत्म करना चाहिए। इससे प्रोजेक्ट की लागत बढ़ जाती है।
  • राज्य को लेबर सेस के रूप में करीब 1000 करोड़ रु. मिलते हैं। इस सरकारी फंड से बिल्डरों को पैकेज मिलना चाहिए।
  • जिस प्रोजेक्ट को पूरा करने की लिमिट 2020 थी, अब उसे बढ़ाकर 2021 करना चाहिए। रेरा को यह छूट देनी चाहिए।
  • हर बिल्डर को रेरा में तीन महीने का ब्यौरा देना होता, अभी इसे टालकर छमाही के आधार पर रिटर्न जमा करवाना चाहिए।


Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Hundreds of houses and thousands of flats ready but not buyers, 400 crore business affected


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3epCx6S
via

Comments