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जिस रास्ते पर आईईडी होने का खतरा, उस पर 24 किमी चली टीम, ताकि गांवों तक न पहुंचे कोरोना

(प्रदीप गौतम)दंतेवाड़ा के एटेपाल, तेलम औैर टेटम जाने वाली सड़क। करीब 21 किमी की यह पक्की सड़क 8 साल से नक्सलियों के कब्जे में है। इसे नक्सलियों ने 50 से अधिक जगह-जगह से काट रखा है। जिससे यहां गुजरना हो तो पैदल ही आना-जाना पड़े। आमतौर पर यहां प्रशासनिक अमला आने की जहमत नहीं उठाता। क्योंकि यहां किस जगह आईईडी, प्रेशर बम लगा हो, कोई ठिकाना नहीं।
मगर कोराेना की इस लड़ाई के दौर में स्वास्थ्य विभाग की टीम नक्सलगढ़ की चुनौतियों को भी हराने में पीछे नहीं है। जोखिम उठाकर स्वास्थ्यकर्मी यहां कई किमी चलकर सिर्फ इसलिए पहुंचे ताकि दूसरे राज्यों से आए लोगों को क्वारेंटाइन किया जा सके। टीम की महिला डॉक्टर समेत अन्य कर्मियों ने इस इलाके के एटेपाल के 30, तेलम के 56 और टेटम के 17 ग्रामीणों को क्वारेंटाइन किया है। गुरुवार को डॉ. मनशीला और डॉ. सरस्वती बघेल, स्वास्थ्यकर्मी नागेश कुमार, हेमंत मिश्र के साथ इन तीनों गांवों में गईं और बाहर से आए ग्रामीणों की जांच के बाद उन्हें बीमारी के बारे में बताया। ग्रामीणों को 28 दिन गांव से बाहर रहने की सलाह दी। इसके साथ ही टीम ने लोगों को एहतियात बरतने के साथ बार-बार हाथ धोने केबारे में भी सिखाया।

इस समय कोराेना का डर मिटाना ज्यादा जरूरी
नक्सल प्रभावित इलाके में आने में डर नहीं लगता? इस सवाल पर डॉ. मनशीला औैर डॉ. बघेल ने कहा कि अभी तो कोराेना के डर को हराना ज्यादा जरूरी है। अगर हम नहीं आएंगे और इस गांव में एक भी व्यक्ति संक्रमित हुआ तो यह ग्रामीण जिस संकट में पड़ेंगे उसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। इसलिए किसी भी जोखिम से बढ़कर इस समय अपनी ड्यूटी निभाना है।
कुछ दूर एंबुलेंस, फिर 11 किमी पैदल चली टीम
21 अप्रैल की रात को तेलम, टेटम, एटेपाल के ग्रामीण तेलंगाना से पहुंचे, लोगों ने स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। इसके बाद गुरुवार को बड़ेगुडरा के रास्ते चिरायु टीम को रवाना किया गया। एंबुलेंस से टीम के चारों सदस्य बड़ेगुडरा से दो किमी आगे आए, फिर पैदल ही आगे के 11-12 किमी का रास्ता पूरा किया। टीम आने-जाने में करीब 24 किमी पैदल चली।
जंगलों से होते तेलंगाना से आ रहे सैकड़ों ग्रामीण
कुआकोंडा, कटेकल्याण ब्लाॅक में तेलंगाना से आने वालों की संख्या दो दिनों में बढ़ गई है। मिर्ची तोड़ने तेलंगाना के नीलीपाका गए ग्रामीण सैकड़ों की संख्या में अलग-अलग समूह में दो-दो सौ किलोमीटर पैदल चलकर पहुंच रहे हैं। इन्हें क्वारेंटाइन करने टीम लगी हुई है। बॉर्डर सील है, तब भी लोग जंगल, पहाड़ी पारकर गांवों में पहुंच रहे हैं।



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The team walked 24 km on the path on which IED was threatened, so that Corona did not reach the villages


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