अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और महारानी मेडिकल कालेज जगदलपुर के बाद मंगलवार से राजधानी के पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कालेज में भी कोरोना की जांच शुरू कर दी गई है। यहां रायपुर के अलावा सरगुजा और बिलासपुर संभाग (कोरबा को छोड़कर) से आने वाले सैंपल की जांच होगी। पहले दिन रायपुर के 20 और बालोद के दो सैंपल जांचे गए और सबकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। प्रदेश में अभी दो से ढाई सौ सैंपलों की जांच रोजाना हो रही है। रायपुर वायरोलाॅजी लैब में जांच शुरू होने के बाद यह संख्या औसतन 350 या अधिक होजाएगी।
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कोरोना जांच की तैयारी 18 मार्च से शुरू हुई थी, उसी दिन कोरोना के पहले संदिग्ध का टेस्ट किया गया था, जो अगले दिन पाजिटिव मिला। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जब मेडिकल कालेज परिसर की वायरोलाॅजी लैब में जांच शुरू हुई, तो डाक्टर और टेक्नीशियन खासे उत्साहित थे। यह जांच सोमवार को ही शुरू हो जाती, लेकिन तब तक इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने ट्रायल जांच को देरी से अप्रूव किया था। इसलिए जांच शुरू करने की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू की गई।
कोरोना वारियर्स... लैब में 7 से 8 घंटे रहने के लिए तैयार है पूरी टीम
जिस समय तक जांच रिपोर्ट नहीं आगई, सारे डाक्टर और टेकनीशियन पीपीई किट में ही थे। भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि सभी मानसिक रूप से तैयार हैं कि लैब में 7 से 8 घंटे रहना है। टेस्ट रिपोर्ट अाने के बाद सबने पीपीई किट, मॉस्क, ग्लब्स व विशेष चश्मा निकाला। इसके बाद पूरे शरीर को सेनेटाइज किया, तब जाकर घरों को रवाना हुए। सभी ने अस्पताल के कपड़े घर के बाहर ही निकाले। वहां नहाने के बाद ही सभी घर के भीतर दाखिल हुए। दरअसल सैंपलों से भी जांच व इलाज करने वाली टीम को संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए मरीजों के नाक व गले से सैंपल सावधानी से लेना होता है।
मशीन में 1 बजे लगाए सैंपल, रिपोर्ट आई रात 9.15 बजे
मंगलवार को दोपहर एक बजे सैंपलों को मशीन में लगाया गया। इसके पहले डॉक्टर व टेक्नीशियन ने पीपीई किट पहनी। रात 9.15 बजे रिपोर्ट आई। सभी नेगेटिव रिपोर्ट देखकर स्टाफ की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें लैब से निकलने की अनुमति नहीं होती। जब रिपोर्ट आ गई तो उन्हें भी संतोष हुआ कि उनकी जांच की पूरी प्रक्रिया सही रही। गौरतलब है, लैब में सैंपल टेस्ट के लिए लगाते समय विशेष सावधानी बरती गई। जांच पूरी होने के बाद भी सैंपल सुरक्षित रखे गए हैं। वायरोलॉजी लैब की टीम का कहना है कि कोरोना को हराना है, इसी संकल्प के साथ जांच शुरू हुई है। संदिग्ध मरीजों की जांच जल्द हो, यही संकल्प है। छत्तीसगढ़ जल्द कोरोना फ्री स्टेट हो, ये भी कामना करते हैं।
मार्च में जांच के लिए आईसीएमआर को पत्र लिखा गया था। देरी से अनुमति मिली, इसलिए जांच शुरू नहीं कर पाए। डेढ़ हजार जांच किट है। जरूरत पड़ने पर और मंगाए जाएंगे। - डॉ. अरविंद नेरल, एचओडी माइक्रोबायोलाॅजी, नेहरू मेडिकल कालेज
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