9 अप्रैल को कोटा राजस्थान से रायगढ़ आ रहीं दो छात्राओं की गाड़ी का जबलपुर में एक्सीडेंट हो गया था, जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं दी। इसके बाद मध्यप्रदेश सरकार से अनुमति लेकर अपने घर आ रहीं इन दोनों छात्राओं को पेंड्रा के बॉर्डर से छत्तीसगढ़ पुलिस ने वापस कर दिया गया । अफसरों ने कहा कि बाहर से आने वालों को 14 दिनों का क्वारेंटाइन करना पड़ेगा। छात्राओं ने मना किया तो उन्हें प्रदेश में घुसने नहीं दिया गया। वे दोनों वापस जबलपुर लौट गईं, अब परिजन चिंतित हैं। इसके साथ ही कोटा में फंसे स्टूडेंट्स के अभिभावक सरकार के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि उन्हें वापस घर लाया जा सके।
जिले से 208 स्टूडेंट्स नीट, जेईई की तैयारी के लिए कोटा में हैं। इन बच्चों के परिजन कहते हैं कि मध्यप्रदेश, गुजरात, झारखंड जैसे राज्यों ने बच्चों को बुलाने का इंतजाम किया है फिर प्रदेश सरकार को भी इस पर तुरंत निर्णय लेना चाहिए। जिले के अफसरों का कहना है जिले में नोडल अफसर बनाया गया है। जिले के जो बच्चे वहां हैं उनके नाम और पते लिए गए हैं। शासन द्वारा राजस्थान सरकार को जानकारी दी है। बच्चों को वहां कोई तकलीफ नहीं होने दी जाएगी।
पुलिसकर्मी हॉस्टल में आकर भोजन दे रहे हैं
कोतरा रोड के स्टूडेंट वैभव सिंह के पिता कृष्ण कुमार कहते हैं, पिछले एक साल से बेटा कोटा में जेईई मेंस की तैयारी कर रहा है। सुबह और शाम भोजन भी ठीक से नहीं मिल पा रहा है। हॉस्टल में सिर्फ 4 लोग ही बचे हुए हैं । स्थानीय लोगों की मदद से कोटा के पुलिसकर्मी हॉस्टल पर जाकर कभी-कभी भोजन दे देते हैं। बार-बार यहां अफसरों के हाथ जोड़ रहे हैं। हमें अनुमति मिल जाए तो हम बच्चों को खुद ही जाकर ले आ जाएंगे।
छत्तीसगढ़ छोड़ सभी राज्यों के बच्चे वापस जा रहे हैं
पूर्व पार्षद रामकृष्ण खटर्जी के पुत्र आयुष खटर्जी दो साल से कोटा में नीट की तैयारी कर रहे हैं। आयुष ने कहा, मेरे साथ एक और स्टूडेंट फंसा हुआ है। बाकी पूरा हॉस्टल खाली हो चुका है। रसोइया अपने घर चला गया है। वहां पर भोजन बनाने के लिए कोई नहीं है। कोरोना पॉजिटिव केस यहां लगातार बढ़ रहे हैं, हमें डर लग रहा है। पिता रामकृष्ण कहते हैं, हमने प्रशासन से अनुमति मांगी लेकिन कोई मदद नहीं मिल रही।
928 किमी तक आ गईं, 232 किमी दूर था घर
कोतरा रोड अटल नगर निवासी रूचि स्मिता, नैंसी मल्लिक की गाड़ी का जबलपुर के पास एक्सीडेंट हुआ था । वहां इन छात्राओं के एक परिचित के घर रुकना पड़ा। छात्राओं ने ठीक होने के बाद 14 अप्रैल को जबलपुर में प्रशासन से अनुमति ली। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बॉर्डर पेंड्रारोड में उन्हें रोक दिया गया है। उन्हें पेन्ड्रा में ही 14 दिनों तक क्वारेंटाइन में रहने के लिए कहा गया। दोनों छात्राएं इसके लिए तैयार नहीं हुईं तो उन्हें वापस जबलपुर भेज दिया गया। नैंसी की मां कविता मल्लिक कहती हैं, उन्होंने लगातार रायगढ़ जिला प्रशासन से गुहार लगाई लेकिन नियमों की बात कहकर उन्हें लाने की अनुमति नहीं दी गई है। पेंड्रा-गौरला-मरवाही की कलेक्टर शिखा राजपूत तिवारी ने कहा, अभी की स्थिति में दूसरे राज्यों से अनुमति लेकर आने वालों को छत्तीसगढ़ सरकार को भी बताना जरूरी होता है, क्वारेंटाइन में रखने के बाद ही किसी व्यक्ति को आगे भेजा जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन हैं। कोटा से रायगढ़ 1160 किमी दूर है और पेंड्रा से रायगढ़ की दूरी 232 किमी है।
घर कब जाएंगे, दिन-रात यही सोचते हैं
रायगढ़ जामपाली की श्रेया पटेल कहती हैं, मैं कोटा के एक इंस्टीट्यूट में नीट की तैयारी कर रही हूं। हॉस्टल में रहती हूं, मध्यप्रदेश, असम, उत्तरप्रदेश, गुजरात से आए उनके साथ पढ़ रहे स्टूडेंट्स घर लौट चुके हैं। झारखंड से आए कोचिंग की सहेलियों के लिए भी बस आ रही है। हम कब जाएंगे दिनभर इसी सोच में रहते हैं । कोचिंग में पढ़ाई पूरी तरह बंद हो चुकी है, चिंता की वजह से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। इजाजत मिले तो घर जाऊं, वहीं तैयारी करूंगी।
हरसंभव मदद कर रहे हैं
जिला प्रशासन ने नोडल अफसर बनाया है। हम पैरेंट्स से आवेदन के साथ पूरी जानकारी ले रहे हैं। कोटा के प्रशासन से कोऑर्डिनेट कर हर संभव स्टूडेंट्स को राहत पहुंचा रहे हैं, वे सुरक्षित हैं। आगे शासन का जैसा निर्देश होगा उनके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।'' -यशवंत कुमार, कलेक्टर
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