कोरोना फ्री जिलों या जिन जिलों में 15 अप्रैल से नए पॉजिटिव मरीज नहीं आए हैं, वहां 20 अप्रैल से लॉकडाउन में थोड़ी छूट देने की बात कही थी। रायगढ़ जिले में अब तक एक भी कोरोना पॉजिटिव मरीज नहीं मिला है। इसे देखते हुए सोमवार से बाजार के खुलने की उम्मीद की जा रही है लेकिन जिला प्रशासन और पुलिस ने कहा है कि किसी भी तरह की गलतफहमी में ना रहें। लॉकडाउन 2.0 में 3 मई तक 144 धारा लागू रहेगी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूरी होगा।
सोमवार से जरूरी सामानों के लिए छूट दी जाएगी। यानि सुबह 5 से 9 बजे तक जो दुकानें अब खुल रही हैं, वे 9 बजे के बाद दुकान नहीं खोल पाएंगे लेकिन शाम तक होम डिलीवरी की अनुमति होगी। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक ही दुकान खोलने या कामों की इजाजत दी जाएगी।
ई-कॉमर्स को दी गई अनुमति वापस ली
केंद्र सरकार ने पहले ई-कॉमर्स कंपनियों को कपड़े, स्टेशनरी, एसी, फ्रिज, कूलर, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक आइटम की होम डिलीवरी की इजाजत दी थी। इसका स्थानीय व्यापारियों ने हर जगह विरोध किया। रविवार को गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि ई-कॉमर्स कंपनियां सिर्फ जरूरी समानों की बिक्री ही कर सकती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि इन नॉन-एसेंशियल सामान बेचने की इजाजत स्थानीय व्यापारियों को दी जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, गारमेंट शोरूम या रिटेल दुकानें लॉकडाउन तक बंद ही रहेंगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को हरी झंडी
लॉकडाउन में ग्रामीण या मजदूरों को काम मिले, देश में खाद्यान्न कम ना हो इसलिए गांवों में खेती, फसल कटाई, बिक्री की छूट रहेगी। कलेक्टर यशवंत कुमार ने कहा, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए खेती-किसानी को छूट होगी। खेती से खाद्यान्न और जरूरी सामानों की पूर्ति होगी। रोजमर्रा की दिक्कत नहीं होगी। गांव में मनरेगा के काम कराए जाएंगे। पंचायत व ग्रामीण विकास के कार्य भी सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए शुरू होंगे। गांव में ये काम होंगे तो ना केवल गरीबों को रोजगार मिलेगा बल्कि सामुदायिक हित के काम होंगे, लोगों को काम की तलाश में बाहर नहीं जाना होगा। राज्य सरकार की प्रमुख योजना नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी के साथ गोठानों में काम होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति और स्वच्छता तथा बिजली लाइनों, दूरसंचार ऑप्टिकल फाइबर और केबलों के बिछाने के कार्य को भी इजाजत होगी।
जिले में कोरोना कंट्रोल में है लेकिन सावधानी फिर भी जरूरी
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री व खरसिया विधायक उमेश पटेल संकटकाल के शुरुआती दिनों से ही जिले में मोर्चा संभाले हुए हैं। उन्होंने अभी तक की स्थिति को संतोषजनक बताते हुए स्पष्ट किया है कि खतरा अभी टला नहीं है। हमने कोरोना को जिले में प्रवेश करने नहीं दिया है। इसे फैलने का कोई अवसर जिले में ना मिले इसके लिए जरूरी है कि हम लगातार हाथ धोते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और भीड़ से बचें। इस महामारी से बचने का यही एक उपाय है।
3 मई तक सख्ती से लॉकडाउन का होगा पालन
शहर के ग्रीन जोन में होने के कारण कुछ राहत मिलेगी, लेकिन यह नहीं है कि सब कुछ सामान्य हो जाएगा। सड़कों पर पुलिस सघन चेकिंग करेगी। बेवजह घूमने वालों पर सख्ती से कार्रवाई होगी। शहर के बाहर के उन्हीं उद्योगों और प्रतिष्ठानों को शुरू किया जाएगा जो केंद्र सरकार की गाइडलाइन में है। सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ नहीं होगी। बिना अनुमति के लोगों का शहर से बाहर से आना जाना नहीं होगा।'' -संतोष कुमार सिंह, एसपी
एमसीएच में बना सैंपल कलेक्शन बूथ, अलग से बनी स्क्रीनिंग ओपीडी
संक्रमण से बचने और सुरक्षित रहने के लिए मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने अपनी सुविधा के लिए नए तरीके से बचाव के तरीके इजाद किए हैं। संसाधनों के अभाव में कोरोना जंग लड़ रहे इन चिकित्सकों को स्वयं से सुरक्षित रहना है उचित होगा। रविवार को मेडिकल कॉलेज के मातृ शिशु हास्पिटल में कोरोना संक्रमित और संदिग्ध व्यक्ति के सैंपल कलेक्शन के लिए अलग से बूथ बनाया गया है। अस्पताल के अंदर प्रवेश करते ही संक्रमण की जांच कराने पहुंच रहे संदिग्ध लोगों के लिए अलग से स्क्रीनिंग ओपीडी बनाई गई है।
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