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डामर की सप्लाई नहीं, मजदूर भी नहीं मिल रहे, 141 रुपए करोड़ का सड़क निर्माण अटका

लॉकडाउन के दौरान भले ही शासन ने सड़क निर्माण कार्यों को छूट दे दी है। लेकिन जिले में इस छूट के बाद भी काम शुरू होने में कम से कम 1 से 2 माह की देरी है। वजह यह है कि यहां डामर की रिफाइनरी नहीं है। सड़क बनाने के लिए डामर की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में इस डामर के लिए जिले को महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल का मुंह ताकना पड़ेगा। दरअसल में जिले में मुंबई और विशाखापट्टनम से ही डामर की सप्लाई होती है। बिना डामर के जिले में स्वीकृत 141 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली सड़कों का निर्माण अटक गया है तो इधर लॉकडाउन के चलते मजदूरों की समस्या भी आ रही है।
पहले से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत तीनों ब्लॉक में 222 किमी तक सड़कों का जाल बिछाने के लिए 141 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली थी। जिसके बाद सिर्फ गुंडरदेही ब्लॉक के लिए टेंडर हो पाया। बाकी ब्लॉक की टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई थी। इस बीच लॉकडाउन ने ब्रेक लगा दिया। अब टेंडर का मामला भी अटका है। अधिकारी छूट के बाद फिर से टेंडर जारी करने की तैयारी कर रहे हैं।

निर्माण में होगी दो से तीन महीने की देरी बरसात तक पूरा बना पाना अब चुनौती
ऐसी स्थिति में अब सभी सड़कों के निर्माण में 2 से 3 माह तक की देरी होगी तो पूर्व से स्वीकृत सड़कों का निर्माण भी अब बरसात के पहले पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है। बालोद अर्जुंदा मार्ग में भी कोंगनी पुल का काम अंतिम चरण पर आकर अटक गया है। यहां एप्रोच रोड बनना है। ऐसी स्थिति में बरसात के पहले सड़क डामरीकरण पूरा होना चुनौती है। घुमका में भी मकान क्षतिपूर्ति प्रकरण के चलते चौड़ीकरण का काम नहीं हो पाया है तो बालोद सुंदरा मार्ग व कई ग्रामीण क्षेत्र के मार्गों पर राशि स्वीकृत होने के बाद भी डामर की परत नहीं चढ़ पाई है।

एक राज्य से दूसरे राज्य तक परिवहन अभी भी बंद, प्रशिक्षित मजदूर भी फंसे
एक राज्य से दूसरे राज्य तक परिवहन बंद है। ऐसे में अब विभाग के अफसर उन राज्यों की रिफाइनरी से डामर मंगवाने का प्रयास कर रहे हैं पर अब तक सफलता नहीं मिली है। नतीजा जिन सड़कों का टेंडर हो गया है वहां भी अब काम शुरू होने में देरी है इधर कई मजदूर 2 हफ्ते पहले ही अपने घरों में पहुंच गए थे जो अब वहीं फंसे हुए हैं तो स्थानीय मजदूर भी काम नहीं कर रहे हैं। विभाग के अंतर्गत चलने वाले अधिकतर सड़क निर्माण में झारखंड और बिहार के प्रशिक्षित मजदूर काम करते हैं जो अभी अपने राज्यों में हैं। लॉकडाउन के कारण वे नहीं आ पा रहे हैं।

प्रयास कर रहे हैं जल्दी ही व्यवस्था बन जाए
निर्माण कार्य की छूट मिली है तो अब तक काम शुरू क्यों नहीं हुआ?

-जिले में मुंबई व विशाखापट्टनम की रिफाइनरी से डामर आती है जो अभी नहीं आ पा रही है।
तो क्या सड़कों का काम यूं ही लटका रहेगा, बरसात में तो नहीं बन पाएगा?
-गुंडरदेही ब्लॉक के सड़कों के लिए टेंडर हो गया है। अन्य ब्लॉक के लिए भी टेंडर जारी किया जा रहा है। प्रारंभिक काम चलते रहेंगे। मजदूरों की भी समस्या है
क्या स्थानीय मजदूरों से काम नहीं हो सकता?
- डामरीकरण व चौड़ीकरण के दौरान कई तरह की मशीनें चलानी पड़ती है जो प्रशिक्षित मजदूर ही कर सकते हैं। कुछ काम स्थानीय मजदूरों से ही ले सकते हैं। प्रयास कर रहे हैं जल्दी व्यवस्था बन जाए।



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No supply of asphalt, laborers are also not getting, road construction worth Rs 141 crore stuck


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