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लाॅकडाउन में फंसे 11 श्रमिक भूखे पेट पैदल ही बिलासपुर के लिए रवाना हुए

लाॅकडाउन में राजनांदगांव जिले अंतर्गत मोहला थाना के एटककन्हार से पाण्डवानी गांव तक सड़क निर्माण में जुटे 11 मजदूरों को ठेकेदार ने मदद नहीं की। ये मजदूर शनिवार शाम को पैदल ही बिलासपुर जिले के थाना बेलगहना के सोईधार गांव के लिए रवाना हो गए। इस दौरान उनके पास ना ताे पैसा था औरना खाने का सामान।
दोपहर 12 बजे मानपुर चाैंक में पुलिस बेरिकेट लगाकर चेकिंग के दौरान बिटाल की ओर से एक मीटर की दूरी बनाकर पैदल आ रहे श्रमिकों से पूछताछ की गई तो पता चला कि 11 श्रमिक कुवंर सिंह तिग्गा, कमोल सिंह, अंजोर सिंह, सभार सिंह, सुखसेन, कुवंर साय, दशरथ केरकट्टा, दुर्गेश केरकट्टा, अजय किन्डो, कपिल चंद्रा और सुकेन्द्र कुजुर एकट कन्हारगांव से लगभग 50 किलीमीटर दूरी तय कर मानपुर चैक पहूंचे हैं।

चेकिंग में तैनात पुलिस जवानाें ने थाना प्रभारी टीएस पटटावी को इसकी सूचना दी। पटटावी ने तत्काल पहूंचकर उन्हें पथराटोला पूर्व माध्यमिक शाला के रंगमंच में ठहरा कर इसकी जानकारी स्थानीय एसडीएम और तहसीलदार को दी। लेकिन कोई भी आला अधिकारी नहीं पहुंचे। सरपंच विमल कुमार कोमा, कोटवार गोविंद दास, विश्राम धनकर, रूपसिंह यादव सहित अन्य ग्रामीणों की मदद से श्रमिकों को भोजन कराया।

ठेकेदार ने पैसे का हिसाब भी बराबर नहीं किया
श्रमिकों ने बताया हमें लाॅकडाउन के पूर्व 14 मार्च को बिलासपुर के लेबर सप्लायर सतीश जायसवाल ने लेकर आया। 15 से 21 मार्च तक काम किया। इसके बाद लाॅकडाउन हो गया है और काम को बंद करवा दिया गया। पुनः 21 से 25 अप्रैल तक डामरीकरण का कार्य करावाया गया। इस बीच ठेकेदार ने श्रमिकों के खाने पीने व्यवस्था नहीं की। काम के एवज में पैसे का हिसाब भी बराबर नहीं किया जा रहा था। कभी भूखे रहने की नौबत तक होती थी। सभी श्रमिक ठेकेदार को सूचना देकर रवाना हो गए।



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11 workers trapped in lockdown left for Bilaspur on foot hungry


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