रांची .झारखंड में भी बिहार के कई लोग रहकर मजदूरी करते हैं। कोरोना वायरस को लेकर हुए 21 दिन के हुए लॉकडाउन के बाद मजदूरों को परेशानी हो रही है, क्योंकि इनका काम बंद हो गया है। अब इन मजदूरों के पास एक ही चारा है या तो ये कहीं से मांगकर खाएं या फिर अपने घर चले जाएं। बहुत से मजदूर ऐसे हैं, जो मांगकर खाना नहीं चाहते। लेकिन, बिना भोजन के वे 21 दिनाें तक जिंदा नहीं रह सकते हैं। इसलिए, कई मजदूर अब झारखंड छोड़कर अपने घर बिहार जा रहे है। गाड़ियां चल नहीं रही है। इसके बाद भी कोई पैदल तो कोई अपने ठेले से ही निकल पड़ा है।
ठेला से छह लेबर रांची से बेगूसराय के लिए निकले
शनिवार को रांची के तुपुदाना में रहने वाले छह मजदूर अपने ठेले से ही बिहार के बेगूसराय के लिए निकल पड़े। इनका कहना था कि क्या करें। ठेले से घर न जाएं तो यहीं जान दे दें क्या? खाने को मिल नहीं रहा है। पास में पैसे नहीं हैं। शहर के अंदर कई सामाजिक संस्थाएं भोजन करा रहीं हैं, पर शहर के बाहर एक रोटी बांटने वाला तक नहीं है।
कांके से भी बिहार के लिए पैदल निकले कई मजदूर
कांके में रहने वाले भी बिहार के कई मजदूर शनिवार को पैदल ही बिहार के लिए निकल पड़े। रास्ते में पुलिस की नजर उन पर पड़ी तो उन्हें रोका गया। कहा कि खाने को नहीं मिल रहा है तो यहां रहकर क्या करेंगे। इसलिए, अपने घर बिहार जा रहे हैं। यहां अगर 14 अप्रैल तक रहे तो भूखों मरने की नौबत आ सकती है।
अफसर के पैर पड़े, बोला- घर पर भी बीबी-बच्चे भूखे हैं
तस्वीर करमटोली चौक की है। रोकने पर एक मजदूर ने अधिकारी के पैर पकड़ लिए। बोला- साहब, यहां तो हमें भोजन मिल जाएगा। पर, घर पर भी बीबी और बच्चाें के लिए भोजन कम पड़ने लगे हैं। वहां भी भोजन नहीं है। वहां जाएंगे तो भोजन की व्यवस्था करेंगे। जितना जुटेगा, उतना ही खाकर सभी एक साथ जीएंगे या मरेंगे।
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