रांची (पवन कुमार).काेराेना से पीड़ित गंभीर मरीजाें के लिए वेंटिलेटर की सख्त जरूरत हाेती है। शुक्र है कि अभी झारखंड में काेई भी काेई भी काेराेना पाॅजिटिव नहीं पाया गया है। लेकिन अगर हालात बिगड़े ताे क्या, झारखंड इसके लिए तैयार है? भास्कर ने पड़ताल की ताे चाैंकाने वाले खुलासे हुए। पता चला कि किसी भी जिला अस्पताल या सीएचसी-पीएचसी में वेंटिलेटर की सुविधा ही नहीं है। पूरे राज्य में सरकारी और निजी अस्पतालाें में कुल 350 वेंटिलेटर ही हैं। उनमें भी कई खराब हैं। निजी अस्पतालाें के 261 बेड चिह्नित किए गए हैं। राष्ट्रीय अाैसत 43 हजार लाेगाें पर एक वेंटिलेटर है, जबकि झारखंड में 73 हजार लाेगाें पर एक वेंटिलेटर है।
रिम्स में 50, सदर में 2, एमजीएम अस्पताल में 5 और पीएमसीएच में 4
राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में कुल 50 वेंटिलेटर हैं। इनमें 25 वेंटिलेटर अापात स्थिति के लिए रखे गए हैं। तभी डाॅक्टर, नर्स अाैर स्टाफ काे इमरजेंसी से निपटने की ट्रेनिंग दी गई है। इसके अलावा रांची सदर अस्पताल में दो, एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर में 5 और पीएमसीएच धनबाद में 4 वेंटिलेटर हैं।
रिम्स के किस विभाग में कितने
| विभाग | वेंटिलेटर |
| ट्रॉमा | 13(पांच कार्डियक, दो इमरजेंसी में) |
| कार्डियक | 2 |
| सीटीवीएस | 5 |
| मेडिसिन आईसीय | 3 (पुराना सप्लाई) |
| न्यूरो | 15 |
| पेडियाट्रिक सर्जरी | 12 |
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