बीएसएल कर्मी अपनी सुविधाओं को लेकर इन दिनों यूनियन नेताओं की जमकर खिंचाई कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर यूनियन नेताओं की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन नेताओं पर प्रबंधन के पक्ष में काम करने का आरोप लग रहे हैं। बीएसएल कर्मियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, क्वार्टर आवंटन, प्रोन्नति, ग्रुप इंश्योरेंस आदि सुविधाएं बेहतर तरीके से लागू करने की मांग की है। सोशल साइट पर कर्मचारियों का कहना है कि बीजीएच में कोरोना पीड़ितों के लिए 91 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। लेकिन कोई कोरोना पीड़ित होगा, तब उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया जाएगा, लेकिन जिनको मामूली सर्दी-खांसी होगी, उनके इलाज के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। ओपीडी में दो डाक्टर हैं, जो पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि बीएसएल में कार्यरत लोगों को बीजीएच में विशेष सुविधा मिले। अधिकारियों-कर्मचारियों का दवा काउंटर अलग हो। रिटायर कर्मियों के लिए अलग व्यवस्था हो। सुश्रुत वार्ड कर्मचारियों को दिया जाए। वहीं अधिकारियों को धनवंतरी वार्ड दिया जाए। अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन, खून जांच आदि में वरीयता मिले। निशुल्क मोटरसाइकिल-कार स्टैंड में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। ओपीडी सुविधा सिर्फ कार्यरत और रिटायर लोगों के लिए ही हो। मरीजों से व्यवहार कैसे करें, स्टॉफ को इसका नियमित प्रशिक्षण दिया जाए।
शहर के स्कूलों में फीस आधी हो
स्टील सिटी में चल रहे सभी स्कूलों में बीएसएल के कर्मचारियों के बच्चों की फीस आधी करवाने की व्यवस्था हो। नहीं तो दूसरी तरफ बीएसएल सभी स्कूलों से बाजार दर पर शुल्क ले तथा अपने कर्मचारियों को वेतन में दो बच्चे की आधी स्कूल फीस दे।
कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा उठाए प्रबंधन
जिस प्रकार मैनपावर घट रहा है तथा लेबर प्रोडक्टिविटी बढ़ रहा है, उसके तहत अपने कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा रखने के लिए प्रत्येक तीन साल पर प्रमोशन हो। क्लस्टर प्रमोशन के लिए परीक्षा का प्रावधान को समाप्त किया जाए। विश्वकर्मा पुरस्कार, श्रम पुरस्कार प्राप्त कर्मचारियों को अधिकारी प्रमोशन में वरीयता मिले। सुपरवाइजरी कैडर को लागू करे, जिसके पास सभी कार्यों के प्रारंभिक शक्ति हो। जैसे ठेका मजदूर की हाजरी, कार्य की निगरानी आदि।
ग्रुप इंश्योरेंस एक जैसा होना चाहिए
ग्रुप इंश्योरेंस के लिए सेल लेवल पर एक ही नियम हो। सभी जगह ग्रुप इंश्योरेंस की राशि एक समान हो। अभी कहीं पचास लाख, कहीं पच्चीस लाख, कहीं पंद्रह, तो कहीं पांच लाख है।
हर माह सीईओ का जनता दरबार लगे
हर माह सीईओ जनता दरबार लगाए या टाटा स्टील जैसा एमडी कॉलिंग की ऑनलाइन व्यवस्था हो। कारखाना अधिनियम के तहत श्रमिकों को सब्सिडी रेट पर बिजली मिले। टाउनशिप मेंटेनेंस के लिए एक एप्प बनाया जाए। जिसमें सभी शिकायतें दर्ज कराने की सुविधा हो।
टाउनशिप में व्यवस्था दुरूस्त हो
सभी प्रकार के खाली आवासों की सूची इंट्रानेट पर दी जाए। डिबार पिरियड को तीन माह का किया जाए। आवास के क्षेत्रफल के हिसाब से राशि का प्रावधान किया जाए। सिविल मेंटनेंस भत्ता शुरू की जाए। कर्मचारी को दो ई-टाइप क्वार्टर देने की व्यवस्था शुरू हो। इससे आज के आधुनिक दौर मे थोड़ा आराम हो जाएगा तथा क्वार्टरों पर अवैध कब्जा पर भी लगाम लगेगा। पांच बार आवंटित होने के बाद भी खाली सी-टाइप क्वार्टर अगर कोई अधिकारी नहीं ले रहा है, तो उस क्वार्टर को एस-6 से ऊपर के कर्मचारी को देने का प्रावधान बनाया जाए। प्राइम लोकेशन वाले सेक्टर के क्वार्टर सिर्फ बीएसएल कर्मचारी तथा अधिकारी को ही मिले। दूसरी एजेंसी को दूसरी जगह आवंटित किया जाए। सभी सेक्टर के जर्जर क्लब के लिए बोकारो क्लब की तर्ज पर ट्रस्ट बनाया जाए।
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