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सिम्स में डॉक्टरों को नहीं दी गई सुरक्षा किट


सिम्स के डॉक्टर असुरक्षा के बीच काम करने को विवश हैं। कोरोना को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जो दिशा-निर्देश व सावधानियां बरतने को कहा है उसका यहां कतई पालन नहीं किया जा रहा है। कोरोना की जांच के लिए जो उपकरण डॉक्टर व स्टाफ को दिए जाने हैं वह नहीं दिए गए हैं जिससे आक्रोश पनपता जा रहा है। दो दिन पहले पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए डॉक्टर द्वारा इस्तीफा दिया जाना भी इसी की एक कड़ी था।

जांच के दौरान संक्रमित होना तय

कोरोना संक्रमित या संदिग्ध मरीज की जांच के लिए विशेष चश्मा, गाउन, कैप, मास्क तथा किट दी जाती है। जो यहां के डॉक्टर व नर्स को नहीं दी गई। जरूरी सुरक्षा उपकरणों के बिना ही डॉक्टर मरीजों की जांच करने में जुटे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि भले ही हम यह मानकर जांच कर रहे हैं कि आने वाले मरीजों को सिर्फ सर्दी, खांसी या बुखार है। अगर कोई मरीज वास्तव में कोरोना संक्रमित हुआ और उसकी जांच हम लोगों ने बिना सुरक्षा उपकरणों के की तो हमारा भी संक्रमित होना तय है।

नागपुर के आडियो का दे रहे हवाला

कुछ डॉक्टरों ने एक ऑडियो क्लिप भी उपलब्ध कराई जिसमें नागपुर के एक अस्पताल का हवाला दिया है। क्लिप में दो डॉक्टर फोन पर बात करते हुए बता रहे हैं कि नागपुर में कोरोना पॉजीटिव के 59 मरीज मिले हैं। इनका इलाज कर रहे डॉक्टरों में से 3 की हालत खराब है जबकि एक डॉक्टर को वेंटिलेटर पर रखा गया है। ऑडियो क्लिप में यह भी कहा गया है कि तीनों डॉक्टरों की जांच लोकल स्तर पर कराई गई लेकिन वह निगेटिव निकली, जबकि उनकी हालत दिन ब दिन खराब होती गई। इसके बाद सैम्पल जांच के लिए मुम्बई भेजे गए तो वहां पॉजीटिव मिले। पैथॉलाजी लैब व तकनीशियनों पर भी इसमें सवाल उठाए गए हैं और बताया जा रहा है कि लैब की हालत बहुत खराब है और तकनीशियन भी पूरी तरह से प्रशिक्षित नहीं हैं। बस यही बात सिम्स के डॉक्टरों को भयभीत किए हुए है। डॉक्टर कह रहे हैं कि हम जांच व इलाज करने से नहीं बचना चाहते पर सुरक्षा के जरूरी उपकरण तो उपलब्ध कराए जाएं।

जो प्रोटोकाल है उसका पालन हो रहा है


- डाॅ. पीके पात्रा, डीन, सिम्स

सिम्स के डॉक्टरों को नहीं दी गई चश्मा, गाउन, कैप, मास्क व किट।

कोई संक्रमित पहुंच गया तो फिर क्या होगा?

अभी तक सबसे बड़ा सवाल यही बना ह़ुआ है कि अगर कोई कोरोना संक्रमित मरीज पहुंच गया तो क्या होगा? संक्रमित मरीज पहले रजिस्ट्रेशन कराएगा, फिर लाइन में लगा रहेगा, उसके बाद जांच कराने जाएगा, दवाई लेगा। इन सबके बीच वह सैकड़ों लोगों के बीच से होकर निकलेगा। जिम्मेदार डॉक्टर तो कह रहे हैं कि कोरोना के लक्षण अलग ही नजर आ जाते हैं। वहीं यही डाक्टर यह भी कह रहे हैं कि कोरोना के लक्षण बहुत देर से सामने आते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि संक्रमित मरीज पहुंचा तो क्या होगा?



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