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ग्रामीण अंचलों में दूध लाने वाले कतरा रहे, काम वाली बाई ने भी ले ली छुट्‌टी


ग्रामीण अंचलों में अब दूध लाने वाले भी कतराने लगे हैं। वजह कोरोना वायरस से लगी बंदिशें नहीं बल्कि उन्हें वायरस से संक्रमण होने का डर सता रहा है। शहरी और ग्रामीण दोनों जगहों में यह स्थिति यह है कि लोगों की छुट-पुट सुविधा देने में लगे लोग कोरोना वायरस से अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक हुए हैं। मुंगली नाका निवासी पंकज शर्मा ने बताया कि शहर ही नहीं बल्कि गांव वाले भी अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित हैं। गांव से आकर दूध देने वाले भी अब नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि वे भी सरकार के दिए गए तय समय तक घर पर ही रहकर आराम करना चाहते हैं। खुद के संक्रमित होने का डर सता रहा है। सरकार ने अति आवश्यक चीजों में बंदिशें नहीं लगाई है इसके बाद भी वे अपनी सुरक्षा के लिए जागरूक हैं। इसी तरह घरों में काम करने वाली बाइयों ने भी स्थिति लेकर घर पर ही उचित रहना समझा है। इस संबंध में उसलापुर निवासी चंदन तिवारी ने बताया कि काम वाली बाई के अवकाश लेने पर उन्होंने भी नहीं रोका। वजह साफ है कि सामाजिक दूरी के सरकार के उद्देश्य से यह सही भी है। इसी तरह से सरकंडा निवासी राजेश शर्मा ने बताया कि दूध वाले और काम वाली बाई के अलावा वे परिवार के साथ भी एक मीटर की दूरी का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।



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