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जप ले राम नाम हो जाही चारो धाम


नौ दिन नौ रथिया, चइत, कुंवार के महिना, नौ रूप, नौ सक्ती के पूजा

चइत के महिना अब्बड़ पावन महिना आय, इही महिना हिन्दू पंचांग के पहिली महिना आय। विक्रम संवत चइत सुक्ल पक्छ के प्रतिपदा ले हिन्दू बछर के सुरूवात होथे। सुक्ल पक्छ प्रतिपदा ले नौ दिन नौ रथिया म देवी दाई दुर्गा के नौ सक्ती के पूजा करेके परम्परा हवय। हमर पुरखा मन देवता-धामी के पूजा पाठ ल अब्बड़ आस्था अउ विस्वास ले करत आवत हे। नौ दिन देवी के पूजा-पाठ अउ साधना ले सक्ती अउ ऊर्जा मिलथे। नवमी के दिन राम भगवान के जनम म रामनवमी मनाय जथे। सतजुग के आरंभ तको इही महिना ले माने जथे। बसंत रितु के सिरावत अउ गरमी के सुरुवात ले परकिती हर चारो कोती अपन सुघ्घर रूप ल देखाथे। पहार म विराजे देवी मन के महिमा अपरम्पार हवय। देवी दाई मन के सेवा अराधना ल हमर छत्तीसगढ़ म जस गीत ले करे जथे, सुघ्घर जसगीत हवय। गरजई माता के महिमा ल गायेगे हवय।

गरजत निकले गरजई, मदनपुर तीर म, गरजई डोंगरी म, गरजत निकले गरजई।

गरजई माता हर गरियाबंद जिला के पीपर छेड़ी मदनपुर के बीच म बसे धमना गांव के डोंगरी पहार म विराजमान हवय। माता गरजई हर जम्मो गांव के रहवइया के रक्छा करथे। गरजई पहार हर अब्बड़ सुघ्घर बड़का-बड़का हरियर -हरियर रुख-राई ले तोपाय सुघ्घर दिखथे, इहा माता गरजई के दरसन हर सिरतोन हो जथे। चार सवठन निसयनि चघ के जब दरसन करइया , भक्तमन माता के दरबार म जाथे त वोमन ल परकिरति दाई गरजई पहार (पथरा) के दरसन होथे। इही पथरा -पहार ल ठोके ले, बजाय ले, बाजा कस आवाज बाजथे। अइसन लागथे के कोनो लोहा, तांबा, पीतल अस धातु हर बाजत हावय। इहा जम्मो दरसन करइया ,सरद्धालु मन, भक्त मन गरजई पहार ल कोनो पथरा त कोनो नरियर ले ठोक के सत के जांच करथे। धातु के आवाज ल सुन के साक्छात गरजई माता के दरसन ल पा जथे। इहा उपर डोंगरी म सोनई माता, रुपई माता विराजमान हवय। इहा के निसयनि हर बने हवय जेमा चघ के जम्मो दरसन करइया मन गरजई माता के दरसन पा सकत हे। चारो अंग हरियर- हरियर रुख-राई, पहार ल देख के माता गरजई के सक्ती के अनुभव होथे।

सियान मन
के सिखौना


सियान मन के सीख ला माने म भलाई हे। संगवारी हो तइहा के सियान मन नवरात्रि परब ला तन, मन अउ धन ले मनावै, फेर काबर मनावय ए बात ल हमन बने ढंग ल समझ नई पाएन। साल के 12 महीना म 4 बार नवरात्रि के परब आथे। हर 2 महीना के बाद नवरात्रि के परब आथे जेखर विसेस महत्तम हे। चैत्र, आसढ़, आश्विन, अउ पूस के महीना मतलब हिंदी महीना म लगभग मार्च, जून, सितंबर अउ दिसंबर के समय । पूस अउ आसाढ़ के नवरात्रि ल गुप्त नवरात्रि , चैत्र नवरात्रि ला बड़े या बसंत नवरात्रि अउ अश्विन नवरात्रि ला छोटे नवरात्रि या सारदीय नवरात्रि कहे जाथे।

संगवारी हो ये चारों महीना एक प्रकार से संक्रमण के काल होथे। जब जब रितु परिवर्तन होथे तब तब मौसमी बीमारी बढ़े लागथे। जउन ला देखौ तउन खाली अस्पताल जावत दिखथे। काबर के संक्रमण काल म हवा म जीवाणु अउ विसाणु बाढ़े रइथे जउन हर सांस ले हमर शरीर म प्रवेश कर लेथे।

9 दिन नवरात्रि म यज्ञ हवन के विशेष महत्तम होथे। यज्ञ ले निकले धुआं स्वास्थ बर फायदे मंद होथे। यज्ञ ले निकले धुआं सिर्फ मनखे बर लाभदायक होथे अइसे बात नई हे बल्कि ये धुआं हर पसु अउ पक्छी मन बर घलाव फायदेमंद होथे। सांस के द्वारा ये धुआं हा हर जीव के सरीर म पहुँचे जीवाणु कीटाणु ल नष्ट करे के काम करथे। यज्ञ ला अग्निहोत्र घलाव कहे जाथे जेखर मतलब होथे जल, वायु अउ पृथ्वी ला सुद्ध करे बर दिए जाने वाला आहूति।

यज्ञ में जउन समिधा डाले जाथे तेमा 4 प्रकार के चीज़ मिलाये जाथे ।

1. सुगंधित... जेमा रइथे-केlर, अगर, तगर, चंदन, इलायची, जायफल, जावित्री, छबीला, कपूर, कचरी, बालछड़ अउ पानडी।

2. पुष्टिकारक... घृत, गुग्गगुल, सूखा फल, जौ, तिल, चांउर, मधुरस, अउ नरियर।

3. रोगनाशक... गिलोय, सोमवल्ली, ब्रह्मी, तुलसी, इंद्रजव, औरा, मालमांगनी, हरताल, तेजपत्ता, प्रियंगु, सफेद चंदन अउ जटामाशी।

4. मिष्टान्न... जेमा होथे गुड़, छुहारा अउ दाख।

अतेक वैग्यानिक ढंग से बनाये समिधा के जब आहुति दिए जाथे तब एखर धुआं हर साँस के जरिये जा के हमर जम्मो जीव जगत के अउ वातावरन म व्याप्त कीटानु विसानु मन के खात्मा अदृश्य ढंग से कर देथे। यग्य केवल कर्मकांड नही बल्कि चिकित्सापद्धति आय। एखर संगे-संग मंत्रोच्चार से घलाव हमर मन मस्तिष्क अउ आत्मा म सकारात्मक प्रभाव आथे। यग्य ला हवि घलाव कहे जाथे जेखर अर्थ होथे विस ला हरने वाला।

गरजई माता के महिमा


नवरात्रि परब के बैग्यानिक महत्तम

रामनवमीं बिसेस

रामनउमी के तिहार चइत मास के सुक्ल पक्छ के नम्मी के दिन मनाय जाथे। हिंदी धरमसास्त्र के अनुसार ए दिन मरयादा पुरसोत्तम भगवान सिरी राम के जनम होय रिहिस। राम नउमी के तिहार अब्बड़ श्रद्धा अउ आस्था के साथ मनाय जाथे। रामनउमी के दिन चईत नवरात्र के समापन घलो हो जाथे। भगवान श्री रामचन्द्र जी हिन्दू धरम के सबले पूज्यनीय अउ महानतम देव माने जाथे। रमाइन के अनुसार राजा दशरथ के प|ी ल पुत्र नई होत रिहिस त सृंगी रिसी के परसाद ले इही दिन जगत के पालनहार भगवान राम हर राजा दसरथ अउ माता कौसल्या के पुत्र रूप म जन्म लिए रिहिस। जेला “राम” के नाव से सबे हिन्दू समाज जानथे ते राम के आघु अपन व्यक्तित्व मरयादा, नैतिकता, करुणा, छमा, धइर्य, तियाग अउ पराक्रम के सबले अच्छा उदाहरण हाबे। सिरी राम के जीवन काल अउ पराक्रम महर्षि बाल्मीकि रचित संस्कृत महाकाव्य रमायन के रूप म वरनित होय हे। रमायन म सीता ल खोजे के खातिर श्रीलंका जाय बर 8 कोस (24किमी) पथरा के पुलिया के निर्माण बताया गए हावे। जेला हमन रामसेतु कथन। राम नाम के गुनगान तो तुलसीदास ह अपन चउपाई म अब्बड़ सुग्घहर रूप म करे हे “कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा।” जेकर मतलब कलजुग म मुक्ति पाय बर सबले सरल साधन “राम” नाव हरे।

ये बात सत्त हे-

गंगा बड़े न गोदाबरी, न तिरिथ बड़े परयाग।

सकल तिरिथ के पुन इंहा, जेकर हिरदय राम के बास।।

पुरखामन कईथे गोस्वामी तुलसीदास घलो राम के जीवन काल के भक्तिभावपूर्ण परसिद्ध महाकाव्य “रामचरितमानस” के रचना करिस। मरयादा पुरसोत्तम राम आयोध्या के राजा दसरथ अउ रानी कौसल्या के सबले बड़े पुत्र रिहिस। राम के प|ी के नाव सीता अउ एकर तीन भाई रिहिन लक्ष्मण, भरत अउ सत्रुहन। हनुमान, राम के सबले बड़े भक्त माने जाथे। राम ह लंका के राजा रावन (जेहा अधरम के रद्दा ल अपनाय रिहिस) ल मारे रिहिस। सिरी राम के प्रतिष्ठा मरयादा पुरसोत्तम के रूप म हावे। सीरी राम ह मरयादा के पालन बर अपन राज्य, मित्र, माता-पिता, इंहा तक कि अपन प|ी के घलो साथ ल छोड़िस। सिरी राम रघुकुल म जन्मे रिहिन जेकर परमपरा “प्रान जाहु पर बचन न जाहु” के रिहिस। राम के पिता राजा दसरथ ह ओकर सौतेली माता कईकई ल दु इक्छा ल पूरा करे के बचन देहे रिहिस। कईकई ह अपन दासी मंथरा के बहकावे म आके ये बचन के रूप म राजा दसरथ ले अपन पुत्र भरत बर अयोध्या के राजसिंहासन अउ राम बर 14 बरस के बनवास मांगिस। पिता के बचन के रक्छा करे के खातिर राम ह परेम से 14 बरस के बनवास ल स्विकारिस। प|ी सीता ह आदर्स प|ी के रूप म पति संग बनवास जाय ल उचित समझिस।

रश्मि रामेश्वर गुप्ता
बिलासपुर
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डॉ. जयभारती चन्द्राकर गरियाबंद
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गोपाल कृष्ण पटेल जांजगीर
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